‘नाम और पहचान की वजह से निशाना बनाया गया’: छात्रा ने पुलिस पर सांप्रदायिक टिप्पणी और दुर्व्यवहार का लगाया आरोप
बिहार बंद के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आंदोलन में शामिल एक छात्रा ने दावा किया है कि पुलिस ने उसके नाम और पहचान के आधार पर उसके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया। छात्रा का आरोप है कि पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों ने उससे आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणियां कीं।
'नाम और पहचान देखकर अलग व्यवहार किया गया'
छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेने के बाद पुलिसकर्मियों ने उससे ऐसे सवाल पूछे, जिनका आंदोलन से कोई संबंध नहीं था। उसके अनुसार, पुलिस ने पूछा कि "तुम्हें फंडिंग कहां से होती है?" और "जिहाद की ट्रेनिंग कहां से ली?"।
सांप्रदायिक टिप्पणी का आरोप
छात्रा का दावा है कि पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों ने उससे कहा, "बाकी लोग तो आंदोलन करते हैं, तुम तो लोगों का सिर काटती होगी।" छात्रा ने इन टिप्पणियों को उसकी धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए भेदभावपूर्ण और अपमानजनक बताया है।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
इन आरोपों के सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों से निष्पक्ष और संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
पुलिस का पक्ष आना बाकी
फिलहाल इन आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई बयान जारी किया जाता है, तो उसके आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

