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सैयद अता हसनैन बने बिहार के नए राज्यपाल — सेना से राजभवन तक का सफर

सैयद अता हसनैन बने बिहार के नए राज्यपाल — सेना से राजभवन तक का सफर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संवैधानिक आदेश के बाद सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे आरिफ मोहम्मद खान की जगह राजभवन की कमान संभालेंगे, जिन्होंने पिछले 428 दिनों तक राज्यपाल का पद सम्हाला था।

इस नियुक्ति का आदेश 5 मार्च 2026 की देर रात जारी किया गया, जिसमें देश के कई अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपालों एवं उप-राज्यपालों के फेरबदल का भी ऐलान हुआ।

🪖 सैयद अता हसनैन: सेना से राजभवन तक का सफर

सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने लगभग 40 साल की distinguished सेवा दी है। उन्होंने सेना के अनेक बड़े कमांडों का नेतृत्व किया, जिनमें जम्मू‑कश्मीर में 15वीं कोर (चिनार कोर) की कमान संभालना प्रमुख है। इस दौरान उनकी “हार्ट्स एंड माइंड्स” रणनीति को सुरक्षा और स्थानीय समर्थन दोनों में संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण माना गया।

सेना में उनके पदों में 21 कोर का कमांडर और सेना मुख्यालय में मिलिट्री सेक्रेटरी के रूप में कार्य करना भी शामिल है, जो वरिष्ठ अधिकारियों के प्रबंधन और पोस्टिंग्स का महत्वपूर्ण दायित्व होता है। उनके सैन्य करियर को कई उच्चतम पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा पदक (UYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शेरवुड कॉलेज, नैनीताल से की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उनके सैन्य प्रशिक्षण में इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) शामिल है। उन्होंने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज और हवाई के एशिया‑पैसिफिक सेंटर से भी रणनीतिक अध्ययन किए।

सेवानिवृत्ति के बाद हसनैन ने शैक्षणिक और रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। 2018 में वे कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के चांसलर नियुक्त किए गए और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रक्षा मामलों पर अपने विचार साझा करते रहे हैं।

🏛️ राज्यपाल का संविधानिक महत्व

राज्यपाल का पद भारतीय संवैधानिक ढांचे में महत्वपूर्ण होता है। वे राज्य सरकार के कार्यों को संवैधानिक रूप से मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, विधायिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन बनाने में एक संतुलक भूमिका निभाते हैं। हसनैन जैसे अनुभवी सैन्य और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति का यह पदभार लेना बिहार के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्यों को स्थिरता प्रदान करने की दिशा में देखा जा रहा है।

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