शंभू गर्ल्स हॉस्टल छात्रा मौत मामला: एंटी-डिप्रेशन दवाओं से जुड़ा बड़ा खुलासा, SIT को मिला अहम वैज्ञानिक सबूत
बिहार की राजधानी पटना के मुन्नाचक इलाके में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की रहस्यमयी मौत के मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। इस मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी विशेष जांच टीम (SIT) को जांच के दौरान ऐसा अहम वैज्ञानिक सबूत मिला है, जिसने छात्रा की मानसिक स्थिति और घटनाक्रम से जुड़ी कई अहम कड़ियों को जोड़ दिया है। जांच में यह सामने आया है कि छात्रा लंबे समय से गंभीर मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन से जूझ रही थी और इसके इलाज के लिए वह नियमित रूप से एंटी-डिप्रेशन दवाओं का सेवन कर रही थी।
SIT को यह जानकारी हॉस्टल के कमरे से बरामद दवाओं की खाली स्ट्रिप्स से मिली है। पुलिस ने इन स्ट्रिप्स पर दर्ज बैच नंबर के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया और आखिरकार जहानाबाद जिले की उस मेडिकल दुकान तक पहुंच गई, जहां से छात्रा ने ये दवाएं खरीदी थीं। मेडिकल स्टोर संचालक से पूछताछ में पुष्टि हुई है कि छात्रा पिछले कुछ समय से वहां से मानसिक तनाव से जुड़ी दवाएं खरीद रही थी। यह खुलासा छात्रा की मानसिक हालत को लेकर पुलिस की जांच को एक नई दिशा दे रहा है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती तफ्तीश में यह संकेत मिले हैं कि छात्रा पढ़ाई के दबाव और निजी कारणों के चलते गहरे अवसाद में थी। नीट जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी, प्रतिस्पर्धा का तनाव और भविष्य को लेकर चिंता उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही थी। पुलिस का कहना है कि छात्रा भारी मात्रा में दवाओं का सेवन कर रही थी, जिससे उसकी हालत और अधिक बिगड़ सकती थी।
हालांकि, पुलिस इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए हर एंगल से जांच कर रही है। SIT यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा को यह दवाएं किसी डॉक्टर की सलाह पर दी गई थीं या वह खुद से इनका सेवन कर रही थी। इसके साथ ही हॉस्टल प्रबंधन, सहपाठियों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि छात्रा किन परिस्थितियों से गुजर रही थी और आखिरी दिनों में उसका व्यवहार कैसा था।
गौरतलब है कि छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने मामले में गंभीर आरोप लगाए थे और घटना को संदिग्ध बताया था। परिजनों की मांग पर ही राज्य सरकार ने SIT का गठन किया था। अब एंटी-डिप्रेशन दवाओं से जुड़े इस खुलासे के बाद मामला और भी जटिल हो गया है। पुलिस यह स्पष्ट करना चाहती है कि छात्रा की मौत आत्महत्या, ओवरडोज या किसी अन्य कारण से हुई।
फिलहाल SIT पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और मेडिकल रिकॉर्ड को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को सुलझाने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जाएगा। इस बीच यह मामला एक बार फिर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

