बिहार के नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल का पांचवां दिन, पटना समेत कई शहरों में सफाई व्यवस्था चरमराई
बिहार के नगर निकाय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का आज पांचवां दिन है। पटना नगर निगम समेत राज्य के सभी नगर निकायों के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शहरों की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं और लोगों को गंदगी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर राजधानी पटना में देखने को मिल रहा है। नियमित रूप से होने वाली कचरा उठाने की व्यवस्था ठप पड़ गई है। सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने लगा है। बारिश के मौसम में कचरा नहीं उठने से दुर्गंध और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
सफाई कर्मियों की मांगों को लेकर आंदोलन
नगर निकाय कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वे सेवा से जुड़ी समस्याओं के समाधान, वेतन संबंधी मुद्दों और अन्य सुविधाओं को लेकर सरकार से ठोस पहल की मांग कर रहे हैं।
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। नगर निकाय कर्मियों के हड़ताल पर जाने से सफाई, कूड़ा उठाव और अन्य नागरिक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
आम लोगों की बढ़ी परेशानी
हड़ताल के कारण आम लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में घरों से निकलने वाला कचरा समय पर नहीं उठ पा रहा है। लोग मजबूरी में कचरा सड़कों के किनारे या खाली जगहों पर डाल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई तो स्थिति और खराब हो सकती है। खासकर गर्मी और बारिश के मौसम में जमा कचरा बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है।
प्रशासन की नजर आंदोलन पर
नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल को देखते हुए प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि, अब तक हड़ताल खत्म कराने को लेकर कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है। अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं।
पटना नगर निगम समेत पूरे बिहार के नगर निकायों में चल रहे इस आंदोलन से साफ है कि सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कर्मचारियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। अगर जल्द ही कर्मचारियों और सरकार के बीच सहमति नहीं बनती है तो शहरों में सफाई संकट और गहरा सकता है।

