ब्लैकआउट को लेकर सुरक्षा निर्देश जारी: अपार्टमेंट में जेनरेटर बंद रखने की अपील, पूर्ण सहयोग की सलाह
संभावित आपदा स्थितियों से निपटने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने अपार्टमेंट और आवासीय परिसरों में ब्लैकआउट के दौरान जेनरेटर न चलाने की सख्त अपील की है।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि ब्लैकआउट अभ्यास या आपातकालीन स्थिति के दौरान किसी भी प्रकार के प्रकाश स्रोत—जैसे मोबाइल स्क्रीन, टॉर्च या अन्य लाइट—का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, ताकि पूर्ण अंधकार की स्थिति बनाए रखी जा सके और सुरक्षा अभ्यास प्रभावी ढंग से पूरा हो सके।
प्रधान सचिव ने अपने संदेश में कहा कि किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए नियमित पूर्वाभ्यास (मॉक ड्रिल) बेहद आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों की भागीदारी और अनुशासन ही सबसे बड़ी ताकत होती है, जिससे आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली को परखा और मजबूत किया जा सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, ब्लैकआउट अभ्यास का उद्देश्य किसी वास्तविक संकट की स्थिति में बिजली आपूर्ति बंद होने पर नागरिकों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा तंत्र की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करना है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी आपदा के समय लोगों की सुरक्षा और राहत कार्य तेजी से किए जा सकें।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे अभ्यासों के दौरान अनावश्यक घबराहट से बचना चाहिए और सभी निर्देशों का पालन करना चाहिए। स्थानीय निकायों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नागरिकों को पहले से जागरूक करें और मॉक ड्रिल के दौरान समन्वय बनाए रखें।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में बिजली पर अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए इस तरह के अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे न केवल आपदा प्रबंधन प्रणाली की तैयारी का परीक्षण होता है, बल्कि आम नागरिकों में भी आपात स्थिति से निपटने की समझ विकसित होती है।
फिलहाल, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इन निर्देशों को गंभीरता से लें और ब्लैकआउट अभ्यास के दौरान पूर्ण सहयोग प्रदान करें, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

