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औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें बदहाल, जर्जर रास्तों और टूटे नालों से बढ़ी परेशानी, हादसों का खतरा

औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें बदहाल, जर्जर रास्तों और टूटे नालों से बढ़ी परेशानी, हादसों का खतरा

औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली अब गंभीर समस्या बनती जा रही है। यहां की प्रमुख सड़कों की हालत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जबकि जगह-जगह नाले टूटे होने के कारण जलभराव और गंदगी की स्थिति लगातार बनी हुई है। स्थानीय लोगों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े लोगों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत की मांग की है।

स्थानीय निवासियों और उद्योग संचालकों के अनुसार, इन सड़कों पर रोजाना भारी वाहनों की आवाजाही होती है, लेकिन लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बढ़ रही है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब इन गड्ढों में पानी भर जाने से सड़कें तालाब जैसी दिखने लगती हैं।

औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों का कहना है कि जर्जर सड़कें न केवल आवागमन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि माल ढुलाई में भी दिक्कतें पैदा कर रही हैं। समय पर कच्चा माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही बाधित होने से उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण वाहनों की मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है, जिससे परिचालन लागत भी बढ़ रही है।

वहीं दूसरी ओर, क्षेत्र में नालों की स्थिति भी बेहद खराब है। कई जगह नाले टूटे हुए हैं और उनकी सफाई न होने से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। इससे न केवल बदबू और गंदगी फैल रही है, बल्कि मच्छरों और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

व्यापारियों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क और नालों की मरम्मत नहीं कराई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बरसात के दिनों में जलभराव और गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि औद्योगिक क्षेत्र की इन समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। साथ ही सड़कों की तत्काल मरम्मत, नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और कब तक औद्योगिक क्षेत्र के लोगों को इस बदहाल व्यवस्था से राहत मिलती है।

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