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घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए कार्यपालक अभियंता के ठिकाने पर छापा, 8.36 लाख कैश समेत मकान, निवेश और जेवर का खुलासा

घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए कार्यपालक अभियंता के ठिकाने पर छापा, 8.36 लाख कैश समेत मकान, निवेश और जेवर का खुलासा

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद एक कार्यपालक अभियंता की कथित अवैध संपत्ति का मामला सामने आया है। घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद निगरानी की टीम ने देर शाम पटना स्थित लखन इन्क्लेव में उनके आवास पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान टीम को 8.36 लाख रुपये नकद समेत मकान, निवेश और जेवर से जुड़ी संपत्तियों का पता चला है।

घूस लेते पकड़े गए थे अभियंता

जानकारी के अनुसार, निगरानी टीम ने कार्यपालक अभियंता को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने मामले को आगे बढ़ाते हुए उनके आवास और अन्य संभावित ठिकानों की जांच शुरू की।देर शाम निगरानी विभाग की टीम लखन इन्क्लेव स्थित आवास पर पहुंची और दस्तावेजों समेत अन्य सामान की तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात सामने आई है।

8.36 लाख रुपये नकद बरामद

छापेमारी के दौरान निगरानी टीम को 8 लाख 36 हजार रुपये नकद मिले। अधिकारियों ने नकदी को जब्त कर उसकी जांच शुरू कर दी है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम अभियंता के पास कहां से आई और क्या इसका संबंध कथित भ्रष्टाचार से है।नकदी के अलावा तलाशी के दौरान संपत्ति से संबंधित दस्तावेज, निवेश और जेवरात की जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है। बरामद दस्तावेजों और अन्य सामान का मूल्यांकन किया जा रहा है।

मकान और निवेश की भी जांच

निगरानी टीम अब कार्यपालक अभियंता की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जुटा रही है। छापेमारी में मकान से संबंधित कागजात और विभिन्न निवेशों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी है। अधिकारियों द्वारा इन दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि घोषित आय और वास्तविक संपत्ति में कोई अंतर है या नहीं।जेवरात से संबंधित जानकारी भी जांच का हिस्सा है। टीम बरामद सामान और दस्तावेजों का मूल्यांकन करने के साथ आय के स्रोतों की पड़ताल कर रही है।

आय से अधिक संपत्ति की भी जांच संभव

रिश्वत के मामले में गिरफ्तारी के बाद सामने आई संपत्तियों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। निगरानी विभाग यह जांच कर सकता है कि अभियंता की कुल संपत्ति उनकी वैध आय के अनुरूप है या नहीं। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति या अवैध निवेश से जुड़े तथ्य सामने आते हैं, तो उसके आधार पर अलग से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल छापेमारी से सामने आए दस्तावेजों और नकदी का सत्यापन किया जा रहा है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही संपत्तियों और निवेश की कुल कीमत का स्पष्ट आकलन सामने आएगा।निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

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