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1799 दारोगा पदों की परीक्षा पर उठे सवाल, प्रश्नपत्र और OMR वायरल होने के आरोप से अभ्यर्थियों में आक्रोश

1799 दारोगा पदों की परीक्षा पर उठे सवाल, प्रश्नपत्र और OMR वायरल होने के आरोप से अभ्यर्थियों में आक्रोश

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग यानी बीपीएसएससी की ओर से 1799 पदों पर दारोगा बहाली के लिए आयोजित परीक्षा विवादों में घिर गई है। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल होने के आरोपों के बाद अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी बढ़ गई है। कई अभ्यर्थी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द कर दोबारा आयोजित कराने की मांग कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी कुछ ऐसी सामग्री सोशल मीडिया पर सामने आई, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हुआ है। दावा किया जा रहा है कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुईं। इसके अलावा क्रमवार तरीके से अभ्यर्थियों के पास होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

दारोगा बहाली की परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका हजारों उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा मामला बन जाती है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा दी है। यदि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो इसका असर उन सभी उम्मीदवारों पर पड़ेगा जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी।

अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग परीक्षा को रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा आयोजित कराने की है। उनका कहना है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट वास्तविक हैं या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि यदि परीक्षा से जुड़ी सामग्री परीक्षा के दौरान बाहर आई तो वह किस माध्यम से बाहर पहुंची।

क्रमवार अभ्यर्थियों के पास होने के आरोप ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। उम्मीदवारों की मांग है कि परिणाम और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अनुचित लाभ देने की बात सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

विवाद के बीच अब निगाहें बीपीएसएससी और संबंधित अधिकारियों की ओर हैं। आयोग की ओर से परीक्षा से जुड़े वायरल दावों की जांच और अभ्यर्थियों की शिकायतों पर क्या कदम उठाया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। किसी भी परीक्षा को रद्द करने या दोबारा आयोजित कराने का फैसला आधिकारिक जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही लिया जा सकता है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित होना चाहिए। उनका भविष्य इस परीक्षा के परिणाम से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी तरह की शंका को दूर करना जरूरी है। फिलहाल प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट वायरल होने के दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा में वास्तव में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं और आगे आयोग क्या निर्णय लेता है।

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