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दारोगा भर्ती की पीटी पर भी उठे सवाल, अभ्यर्थियों ने EOU के ADG को सौंपे तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्य

दारोगा भर्ती की पीटी पर भी उठे सवाल, अभ्यर्थियों ने EOU के ADG को सौंपे तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्य

बिहार में दारोगा बहाली परीक्षा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 27 मई को आयोजित मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब 21 जनवरी को हुई प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। शुक्रवार को अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरु रहमान और छात्र नेता सौरव कुमार के नेतृत्व में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी अमित जैन से मुलाकात की। इस दौरान अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली से जुड़े तकनीकी तथा फॉरेंसिक साक्ष्य अधिकारियों को सौंपे।

अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके पास मौजूद साक्ष्यों से प्रारंभिक परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका सामने आती है। उन्होंने EOU के अधिकारियों से इन साक्ष्यों की जांच कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मुख्य परीक्षा रद्द होने के बाद बढ़ी चिंता

दारोगा बहाली की मुख्य परीक्षा 27 मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद पेपर लीक और अनियमितताओं से जुड़े आरोप सामने आए थे। मामले की जांच के बाद मुख्य परीक्षा को रद्द कर दिया गया। इसके बाद अब अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि पीटी परीक्षा में भी अनियमितता हुई है तो केवल मुख्य परीक्षा रद्द करने से पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होगी। इसी मांग को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने EOU के एडीजी से मुलाकात की और उपलब्ध दस्तावेज व साक्ष्य सौंपे।

तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों का हवाला

अभ्यर्थियों ने जिन साक्ष्यों को अधिकारियों के सामने रखा, उनमें तकनीकी और फॉरेंसिक जानकारी शामिल होने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि इन साक्ष्यों की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से संबंधित कोई जानकारी बाहर आई थी या नहीं।

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, संदिग्ध गतिविधियों और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करने की मांग की है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

EOU की जांच पर टिकी नजर

मामला अब आर्थिक अपराध इकाई के सामने पहुंचने के बाद अभ्यर्थियों की नजर जांच की दिशा पर है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि उपलब्ध तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराया जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

दारोगा भर्ती परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण पहले ही अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मुख्य परीक्षा रद्द होने के बाद प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उठे नए सवालों ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंता और बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि EOU को सौंपे गए साक्ष्यों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जांच एजेंसी प्रारंभिक परीक्षा को लेकर क्या निष्कर्ष निकालती है।

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