बिहार की पूर्णिया सीट से सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई 31 साल पुराने मामले में उनके जमानत समाप्त होने के बाद की गई। घटना के दौरान पटना में काफी हंगामा देखने को मिला।
सूत्रों के अनुसार, पप्पू यादव शुक्रवार रात पटना पहुंचे थे। घर आने के थोड़ी देर बाद ही पुलिसकर्मी उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों की इस कार्रवाई के दौरान सांसद और उनके समर्थकों ने विरोध किया। पप्पू यादव ने कहा कि वह पुलिस के साथ नहीं जाएंगे और शनिवार को सीधे कोर्ट में पेश होंगे।
हालांकि, पुलिसकर्मी गिरफ्तारी पर अड़े रहे। इस दौरान पप्पू यादव ने हाउस अरेस्ट की मांग भी की, लेकिन पुलिस ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस स्थिति ने पटना में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया। स्थानीय लोगों और मीडिया कर्मियों ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच जोरदार बहस और हंगामा हुआ।
पुलिस ने बताया कि पप्पू यादव के खिलाफ यह मामला 31 साल पुराना है और लंबे समय से अदालत में लंबित था। जमानत समाप्त होने के बाद अदालत ने गिरफ्तारी का आदेश जारी किया। पप्पू यादव और अन्य आरोपियों पर धोखाधड़ी और संपत्ति से संबंधित अपराध का आरोप है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। उनके समर्थक और विरोधी दोनों ही इस मामले को लेकर सक्रिय हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना यह भी दिखाती है कि कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होता है, चाहे वह राजनीतिक रूप से शक्तिशाली व्यक्ति ही क्यों न हो।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस दौरान स्थिति को काबू में करने की पूरी कोशिश की। पुलिस ने कहा कि सांसद को कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में लिया गया है और शनिवार को उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत की कार्रवाई के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी और पटना में हुए हंगामे ने राज्य में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना से लंबित मामलों में कानूनी कार्रवाई की सख्ती का भी संदेश गया है।
इस मामले में यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत और पुलिस किसी भी व्यक्ति के लिए कानूनी कार्रवाई में नरमी नहीं बरत सकते। पप्पू यादव की गिरफ्तारी से यह भी जाहिर होता है कि कानून के तहत किसी की प्रतिष्ठा या पद इसे रोकने में बाधा नहीं बन सकता।
पटना में हुई इस गिरफ्तारी और हंगामे की वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं। राजनीतिक और आम जनता दोनों ही इस घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

