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बिहार में प्रिंटिंग प्रेस संचालकों का सरकार पर आरोप, शिक्षा नीति से व्यवसाय संकट में

बिहार में प्रिंटिंग प्रेस संचालकों का सरकार पर आरोप, शिक्षा नीति से व्यवसाय संकट में

बिहार के प्रिंटिंग प्रेस संचालक सरकार की शिक्षा विभाग की नीतियों से नाराज हैं। उनका कहना है कि इन नीतियों के कारण कई प्रेस बंद होने के कगार पर हैं और सरकारी उदासीनता से उनका व्यवसाय संकट में है।

संचालकों ने बताया कि राज्य सरकार ने 2025 से 2030 तक एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने की घोषणा की है, लेकिन शिक्षा विभाग की हालिया नीतियों ने छोटे और मध्यम प्रिंटिंग प्रेसों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस वजह से पटना के लंगर टोली, दरियापुर और मथुरा टोली इलाकों में सैकड़ों प्रेस बंद होने की कगार पर हैं।

प्रिंटिंग प्रेस संचालकों का कहना है कि सरकारी ठहराव और नीतियों की वजह से उन्हें अपने कर्मचारियों को वेतन देने और कच्चा माल खरीदने में दिक्कतें आ रही हैं। कई प्रेस तो पूरी तरह से बंद होने की स्थिति में हैं। संचालकों ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा विभाग अपनी नीतियों की समीक्षा करे और व्यवसायिक स्थिरता सुनिश्चित करे।

व्यवसायियों ने कहा कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कई वर्षों से चल रहे प्रेसों में ताला लगने की नौबत आ सकती है। इसके परिणामस्वरूप न केवल निवेशकों और कर्मचारियों को नुकसान होगा, बल्कि बिहार की शिक्षा सामग्री और प्रिंटिंग उद्योग भी प्रभावित होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रिंटिंग उद्योग छोटे और मध्यम व्यवसायों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षा विभाग की नीतियों से इसका संचालन प्रभावित हुआ तो राज्य के रोजगार और उद्योगिक संतुलन पर भी असर पड़ेगा।

प्रिंटिंग प्रेस संचालकों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती, तो वे विभिन्न माध्यमों से आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं। उनका कहना है कि नीति बनाने में उद्योग और व्यवसायिक समुदाय की राय को शामिल करना जरूरी है।

पटना प्रशासन ने फिलहाल स्थिति को देखते हुए मामलों की समीक्षा शुरू कर दी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि सरकार जल्द ही प्रिंटिंग प्रेस संचालकों के साथ बैठक कर उनके मुद्दों का समाधान करेगी।

इस विवाद ने यह उजागर किया है कि बिहार में शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल बनाए रखना कितना जरूरी है। सरकारी नीतियों का प्रभाव केवल शिक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि इससे जुड़े व्यवसाय और रोजगार भी प्रभावित होते हैं।

कुल मिलाकर, प्रिंटिंग प्रेस संचालकों की मांग है कि शिक्षा विभाग अपनी नीतियों का पुनरीक्षण करे और व्यवसायों को बंद होने से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए। इस संकट का समाधान न होने पर पटना और आसपास के इलाकों में प्रिंटिंग उद्योग को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

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