बिहार की राजनीति में पोस्टर विवाद पर गरमाई सियासत, आनंद मोहन का बयान चर्चा में
Bihar की राजनीति में एक बार फिर पोस्टर और श्रेय की राजनीति को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पूर्व सांसद Anand Mohan Singh का बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
आनंद मोहन ने सवाल उठाते हुए कहा कि आज बिहार में लगाए जा रहे बोर्डों और पोस्टरों में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव जैसे नेताओं के नाम क्यों नहीं दिख रहे हैं, जबकि वे भी सरकार का हिस्सा हैं और 85 विधायकों के समर्थन का दावा किया जाता है।
उन्होंने कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी को इस मामले में सीधे तौर पर दोष नहीं देना चाहते, क्योंकि हर राजनीतिक दल में एकाधिकार की प्रवृत्ति देखने को मिलती है। लेकिन उन्होंने यह भी सवाल किया कि आखिर सहयोगी दल के नेता इस तरह के मुद्दों पर खुलकर आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं।
आनंद मोहन ने आगे कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar का नाम भी कई पोस्टरों से गायब दिखता है, तो इस पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी जाती। उन्होंने इसे राजनीतिक असंतुलन और आंतरिक खींचतान का संकेत बताया।
उनके इस बयान के बाद राज्य की सियासत में एक नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा भले ही पोस्टर तक सीमित दिखता हो, लेकिन इसके पीछे गठबंधन की राजनीति और श्रेय की होड़ जैसे बड़े कारण जुड़े हो सकते हैं।
फिलहाल इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।
बिहार की राजनीति में पोस्टर और नाम को लेकर उठने वाला यह विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि गठबंधन सरकारों में नेतृत्व और श्रेय की राजनीति कितनी अहम भूमिका निभाती है।

