गर्दनीबाग में कचरा निस्तारण केंद्र को लेकर सियासी घमासान, स्थानीय लोगों का विरोध तेज
राजधानी पटना के पॉश इलाकों में शुमार गर्दनीबाग अब कचरे की राजनीति का अखाड़ा बनने की ओर बढ़ रहा है। इलाके में प्रस्तावित कचरा निस्तारण केंद्र के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध खुलकर सामने आने लगा है। रिहायशी क्षेत्र के बीचों-बीच कचरा निस्तारण केंद्र बनाए जाने की योजना से लोगों में भारी नाराजगी है और वे इसे अपने स्वास्थ्य और जीवन स्तर के लिए बड़ा खतरा बता रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि गर्दनीबाग एक घनी आबादी वाला और प्रमुख रिहायशी इलाका है, जहां बड़ी संख्या में परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। ऐसे में यहां कचरा निस्तारण केंद्र का निर्माण किए जाने से पूरे इलाके में दुर्गंध फैलने की आशंका है। लोगों का दावा है कि इससे न केवल रहने में परेशानी होगी, बल्कि मच्छर, मक्खी और अन्य कीटों के बढ़ने से संक्रामक बीमारियों और महामारी का खतरा भी बढ़ सकता है।
विरोध कर रहे लोगों का यह भी कहना है कि जिस स्थान पर कचरा निस्तारण केंद्र बनाए जाने की योजना है, उसके आसपास स्कूल, पार्क और रिहायशी कॉलोनियां स्थित हैं। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सवाल किया है कि आखिर शहर में अन्य खाली और गैर-रिहायशी स्थानों के बजाय इतनी घनी आबादी वाले इलाके को ही क्यों चुना गया।
कचरा निस्तारण केंद्र के खिलाफ अब स्थानीय स्तर पर बैठकें और प्रदर्शन की तैयारी भी शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कई स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस विरोध को समर्थन दिया है और इसे जनहित का मुद्दा बताया है।
इस मामले ने धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों ने इसे जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार और नगर निगम पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों की आशंकाओं को जायज ठहराते हुए प्रशासन से योजना पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, नगर निगम और प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन का कहना है कि कचरा निस्तारण केंद्र आधुनिक तकनीक से लैस होगा, जिससे दुर्गंध और गंदगी की समस्या नहीं होगी। बावजूद इसके, स्थानीय लोग इन दावों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
फिलहाल गर्दनीबाग में कचरा निस्तारण केंद्र को लेकर विरोध का स्वर लगातार तेज होता जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की आशंकाओं को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इस योजना में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजधानी की राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों की दिशा तय कर सकता है।

