पटना नगर निगम ने अपने ही मेयर को भेजा नोटिस, आवासीय मकान में कॉमर्शियल गतिविधि का आरोप; SC के आदेश के बाद एक्शन
पटना नगर निगम ने अपने ही मेयर को नोटिस जारी कर दिया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद की गई है। मेयर पर आवासीय मकान में कथित तौर पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने का आरोप है। नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में संबंधित भवन और उसमें चल रही गतिविधियों को लेकर जवाब मांगा गया है। मामले के सामने आने के बाद पटना के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, मामला पटना नगर निगम क्षेत्र में स्थित एक आवासीय भवन के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोप है कि जिस मकान का उपयोग आवासीय उद्देश्य के लिए होना चाहिए, वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने कार्रवाई तेज की है। (livehindustan.com)
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, नोटिस में भवन के इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेज और गतिविधियों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। संबंधित पक्ष को यह बताना होगा कि आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधि किस आधार पर संचालित की जा रही है और क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई है।
इस कार्रवाई की खास बात यह है कि नोटिस पटना नगर निगम की मेयर को ही जारी किया गया है। नगर निगम की ओर से अपने ही शीर्ष जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई किए जाने को लेकर मामला चर्चा में है। हालांकि नोटिस जारी होना किसी आरोप के सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अब संबंधित पक्ष के जवाब और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने शहरी क्षेत्रों में भवनों के स्वीकृत उपयोग और नियमों के उल्लंघन को लेकर समय-समय पर सख्त रुख अपनाया है। आवासीय भवनों में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने पर संबंधित स्थानीय निकायों को नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी होती है। इसी क्रम में पटना नगर निगम ने भी अपने क्षेत्र में ऐसे मामलों की जांच शुरू की है।
नगर निगम की कार्रवाई के बाद अब मेयर की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी। यदि जांच में यह सामने आता है कि भवन का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के विपरीत किया गया है, तो नगर निगम नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है। इसमें गतिविधि बंद कराने से लेकर अन्य वैधानिक कदम शामिल हो सकते हैं।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है। विपक्ष इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा सकता है, जबकि नगर निगम प्रशासन का कहना है कि नियम सभी के लिए समान हैं। अधिकारियों के अनुसार, भवन के उपयोग से संबंधित नियमों का पालन कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है।
फिलहाल नगर निगम के नोटिस के बाद मामला मेयर के जवाब और प्रशासनिक जांच पर टिका है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आवासीय मकान में किस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही थी और उसके लिए जरूरी अनुमति मौजूद थी या नहीं।

