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पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला, राजस्व अदालतों की अध्यक्षता करने वाले अधिकारियों को भी मिलेगी न्यायिक सुरक्षा

पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला, राजस्व अदालतों की अध्यक्षता करने वाले अधिकारियों को भी मिलेगी न्यायिक सुरक्षा

पटना हाईकोर्ट ने बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के एक अधिकारी को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भारत में न्यायाधीशों को प्राप्त न्यायिक सुरक्षा (Judicial Protection) का लाभ राजस्व अदालतों की अध्यक्षता करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को भी दिया जा सकता है। इस फैसले को प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब कोई प्रशासनिक अधिकारी विधि द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत राजस्व न्यायालय की अध्यक्षता करता है और न्यायिक कार्य करता है, तो उस दौरान उसके द्वारा पारित आदेशों या किए गए कार्यों के लिए उसे भी वही संरक्षण मिलना चाहिए, जो एक न्यायाधीश को प्राप्त होता है। अदालत ने यह भी साफ किया कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत दुर्भावना के आधार पर आपराधिक या दीवानी कार्रवाई करना न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत के खिलाफ होगा।

यह मामला बिहार प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी से जुड़ा था, जिनके खिलाफ राजस्व न्यायालय में दिए गए एक आदेश को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई थी। अधिकारी की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने कानून के दायरे में रहते हुए न्यायिक कार्य किया था, ऐसे में उनके खिलाफ की गई कार्रवाई न्यायिक संरक्षण के सिद्धांत का उल्लंघन है। इस पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने अधिकारी को राहत प्रदान की।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि न्यायिक सुरक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायिक कार्य करने वाला व्यक्ति बिना किसी डर या दबाव के निष्पक्ष निर्णय ले सके। यदि राजस्व अदालतों की अध्यक्षता करने वाले अधिकारियों को इस सुरक्षा से वंचित किया गया, तो वे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में असहज महसूस करेंगे, जिसका सीधा असर न्याय व्यवस्था पर पड़ेगा।

हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक सुरक्षा का यह लाभ केवल उन्हीं मामलों में मिलेगा, जहां अधिकारी ने सद्भावना (Good Faith) के साथ और अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर रहते हुए निर्णय लिया हो। यदि किसी मामले में अधिकारों का दुरुपयोग, दुर्भावना या भ्रष्ट आचरण सामने आता है, तो ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, बल्कि राजस्व न्यायालयों के कामकाज को भी अधिक स्वतंत्र और प्रभावी बनाएगा। साथ ही, यह निर्णय प्रशासन और न्यायपालिका के बीच कार्य विभाजन और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट करता है।

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