पटना हाईकोर्ट का फैसला: महिला की छाती दबाना और कपड़े उतारने की कोशिश रेप की कोशिश नहीं, आरोपी बरी
पटना हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि बंद कमरे में किसी महिला की छाती दबाना और उसकी सलवार उतारने की कोशिश करना, भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार के प्रयास (Attempt to Rape) की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ बांका के स्टूडियो संचालक हिमांशु उर्फ मिथिया पाठक को बरी कर दिया।
यह फैसला 9 जुलाई को सुनाया गया, जिसमें हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई की। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आरोपी को राहत दी।
क्या था पूरा मामला?
मामला बिहार के बांका जिले से जुड़ा हुआ है। आरोप था कि स्टूडियो मालिक हिमांशु उर्फ मिथिया पाठक ने एक महिला को बंद कमरे में बुलाकर उसके साथ जबरदस्ती की। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके साथ अश्लील हरकतें कीं, उसकी छाती दबाई और सलवार उतारने की कोशिश की।
इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया था और जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार के प्रयास का अपराध साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी का इरादा महिला के साथ बलात्कार करने का था और उसने उस दिशा में ठोस कदम उठाया।
अदालत ने कहा कि केवल अश्लील हरकत या महिला के साथ जबरदस्ती करना अपने आप में गंभीर अपराध है, लेकिन हर ऐसी घटना को बलात्कार के प्रयास के रूप में नहीं माना जा सकता।
साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को मिली राहत
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अध्ययन करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ बलात्कार के प्रयास का आरोप साबित नहीं कर पाया। इसके बाद अदालत ने आरोपी को इस आरोप से बरी कर दिया।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या अशोभनीय व्यवहार कानून की नजर में गलत है और ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फैसले की चर्चा क्यों हो रही है?
पटना हाईकोर्ट का यह फैसला कानूनी विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अपराध में आरोपी की मंशा (Intent) और घटना की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला किया जाता है।
अदालत का निर्णय केवल इस बात पर आधारित था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बलात्कार के प्रयास का कानूनी मानदंड पूरा होता है या नहीं। महिला की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानून अलग-अलग अपराधों के लिए अलग-अलग प्रावधान निर्धारित करता है।

