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पटना में मेट्रो निर्माण को गति देने की तैयारी, बेली रोड पर सात सरकारी परिसरों की बाउंड्री वॉल तोड़ने की योजना

पटना में मेट्रो निर्माण को गति देने की तैयारी, बेली रोड पर सात सरकारी परिसरों की बाउंड्री वॉल तोड़ने की योजना

बिहार की राजधानी पटना में मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्य को सुचारू और तेज करने के लिए प्रशासन ने एक अहम कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। बेली रोड पर मेट्रो निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था को बाधित होने से बचाने और कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से बड़ा ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान तैयार किया जा रहा है।

इस योजना के तहत बेली रोड के दोनों किनारों पर स्थित सात प्रमुख सरकारी भवनों और परिसरों की बाउंड्री वॉल को हटाने या तोड़ने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इससे न केवल निर्माण कार्य के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध होगा, बल्कि सड़क पर जाम की समस्या को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

यह पूरा प्रोजेक्ट पटना में चल रही महत्वाकांक्षी मेट्रो परियोजना का हिस्सा है, जिसे राजधानी के यातायात ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। बेली रोड शहर का एक प्रमुख और व्यस्त मार्ग है, जहां रोजाना हजारों वाहनों की आवाजाही होती है।

अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो निर्माण के दौरान ट्रैफिक को डायवर्ट करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में सड़क के किनारे अतिरिक्त जगह उपलब्ध कराना आवश्यक हो गया है, ताकि निर्माण कार्य में बाधा न आए और साथ ही यातायात भी सुचारू रूप से चलता रहे।

प्रस्तावित योजना के तहत जिन सरकारी परिसरों की बाउंड्री वॉल हटाई जानी है, उनमें प्रमुख प्रशासनिक और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। संबंधित विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस कदम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।

योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेट्रो निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरा हो और शहरवासियों को भविष्य में बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके। साथ ही, निर्माण कार्य के दौरान होने वाली जाम की समस्या और दुर्घटनाओं के जोखिम को भी कम किया जा सके।

स्थानीय प्रशासन का मानना है कि यह कदम अल्पकालिक असुविधा जरूर पैदा कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह शहर के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। मेट्रो परियोजना पूरी होने के बाद पटना की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कुछ स्तरों पर चर्चा भी शुरू हो गई है, क्योंकि सरकारी परिसरों की संरचना में बदलाव एक संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा है। संबंधित विभागों से अंतिम सहमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल प्रशासन इस पूरे मामले पर तेजी से काम कर रहा है ताकि मेट्रो निर्माण और ट्रैफिक व्यवस्था दोनों में संतुलन बनाए रखा जा सके और परियोजना को समय पर पूरा किया जा सके।

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