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जाति जनगणना पर क्रेडिट ले गए पशुपति कुमार पारस, 'ये स्वागत योग्य

जाति जनगणना पर क्रेडिट ले गए पशुपति कुमार पारस, 'ये स्वागत योग्य

केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि देश में जाति आधारित जनगणना कराई जाएगी। बीते बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को हुई कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से जाति जनगणना नहीं हुई है। कांग्रेस ने जाति जनगणना की जगह जाति सर्वेक्षण कराया। कैबिनेट के फैसले के बाद नेता इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बिहार में श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। इसी क्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बड़ा बयान दिया है।

पशुपति कुमार पारस ने कहा कि यह स्वागत योग्य है, लेकिन 30-31 साल पहले 1996 में जब देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे, तब यह मांग संसद में उठी थी। इसमें हमारे बड़े भाई रामविलास पासवान, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव ने मांग की थी कि जाति आधारित जनगणना कराई जानी चाहिए। जनगणना 2011 में आयोजित की गई थी। उसके बाद से यह कभी नहीं हुई। यह इस देश के लोगों की पुरानी मांग थी। कैबिनेट द्वारा दी गई मंजूरी बहुत स्वागत योग्य है। खासकर जो दलित हैं, पिछड़े हैं, सभी लोगों को इससे फायदा होगा।

आरएलजेपी ने केंद्र के फैसले को जीत बताया
वहीं जाति जनगणना पर केंद्र के फैसले को लेकर पशुपति कुमार पारस ने x पर पोस्ट कर लिखा, "भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में मूल जनगणना के साथ-साथ जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है। मैं और मेरी पार्टी हमेशा से देश में जाति जनगणना कराने के पक्ष में रही है, केंद्र का फैसला राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी की मांग की जीत है।"

तेजस्वी यादव भी इसका श्रेय ले रहे हैं।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी इसका श्रेय ले रहे हैं. केंद्र के इस फैसले पर तेजस्वी का कहना है कि यह समाजवादी पार्टी और लालू यादव की जीत है। जब वह (तेजस्वी) बिहार टीम के साथ पीएम मोदी से मिलने गए तो पीएम ने इनकार कर दिया। आज समाजवादियों की ताकत देखिए, उन्हें हमारे ही एजेंडे पर चलना पड़ रहा है।

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