रिश्वतखोरी का नया तरीका! फोन टैपिंग के डर से अफसरों ने बनाए कोड वर्ड, ‘चावल’ और ‘तेल-पानी’ में हो रही डील
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की सख्ती और फोन टैपिंग व ट्रैप कार्रवाई के डर से भ्रष्ट अधिकारियों ने रिश्वत मांगने का तरीका बदल लिया है। अब मोबाइल पर सीधे पैसे की मांग करने से बचने के लिए कई अफसर और बिचौलिए रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का सहारा ले रहे हैं। जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए रिश्वत की रकम के लिए अलग-अलग कोड वर्ड इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, पहले भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी फोन पर ही रिश्वत की रकम और लेन-देन की तारीख तय कर लेते थे। लेकिन निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई और फोन रिकॉर्डिंग के खतरे को देखते हुए अब बातचीत का तरीका बदल गया है। मोबाइल पर रुपये, हजार, लाख या घूस जैसे शब्द बोलने से बचने के लिए सामान्य घरेलू सामानों के नामों को कोड की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कई मामलों में ‘चावल’, ‘तेल-पानी’, ‘पेटी’ और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे शब्दों का इस्तेमाल रिश्वत की रकम या लेन-देन के संकेत के तौर पर किया जाता है। बातचीत सुनने वाले किसी आम व्यक्ति को ये शब्द सामान्य लग सकते हैं, लेकिन संबंधित लोग इनके जरिए रकम और सौदे का मतलब समझ लेते हैं।
निगरानी विभाग की बढ़ी सक्रियता
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम लगातार ट्रैप अभियान चला रही है। रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के कई मामलों के बाद भ्रष्ट अधिकारी सतर्क हो गए हैं। अब वे सीधे बातचीत में पैसे की मांग करने से बच रहे हैं और गुप्त संकेतों के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, जांच एजेंसियां भी ऐसे तरीकों से निपटने के लिए अपने निगरानी तंत्र को मजबूत कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ शब्द बदलने से भ्रष्टाचार छिपाया नहीं जा सकता। लेन-देन से जुड़े अन्य सबूतों, शिकायतों और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
शिकायत मिलने पर होती है कार्रवाई
निगरानी विभाग आम लोगों से मिलने वाली शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करता है। यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो उसकी शिकायत निगरानी ब्यूरो से की जा सकती है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप की कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ा जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार करने वाले लोग चाहे कितने भी नए तरीके अपना लें, कानून से बचना आसान नहीं है। तकनीकी निगरानी और जांच के आधुनिक तरीकों से ऐसे मामलों का पता लगाया जा सकता है।
कोड वर्ड भी बन रहे जांच का हिस्सा
रिश्वत के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नए कोड वर्ड अब जांच एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत बन गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि भ्रष्टाचार करने वाले लोग भाषा बदलकर भले ही बचने की कोशिश करें, लेकिन लेन-देन की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसे सबूत रह जाते हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
निगरानी विभाग की सख्ती के बीच रिश्वतखोरी के बदलते तरीकों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना भी जरूरी है।

