यूपी में सितंबर से पहले तय होंगी बिजली की नई दरें, आयोग ने एआरआर को दी मंजूरी
राज्य में बिजली की दरें निर्धारित करने के लिए जून में सुनवाई होगी। नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा सभी बिजली कंपनियों के लिए दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को स्वीकार कर लिया है। खास बात यह है कि इस बार कंपनियों ने बिजली दरों को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। दरें बढ़ाने या घटाने का निर्णय पूरी तरह से नियामक आयोग पर छोड़ दिया गया है।
विद्युत नियामक आयोग ने पूर्वांचल, दक्षिणांचल, मध्यमांचल, पश्चिमांचल, कैस्को एवं नोएडा पावर कंपनी की वर्ष 2025-26 की एआरआर सहित ट्रू-अप 2023-24 एवं वार्षिक निष्पादन समीक्षा 2024-25 को स्वीकार कर लिया है। विद्युत विनियामक आयोग ने अपने आदेश में लिखा है कि मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के तहत बिजली कंपनियों की ओर से कोई भी बिजली टैरिफ प्रस्ताव दाखिल नहीं किया गया है। कंपनियों को तीन दिन के अंदर सभी आंकड़ों का खुलासा करना होगा।
ग्राहकों को अपनी आपत्तियां और सुझाव 21 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने होंगे। यह आयोग जून 2025 में जन सुनवाई शुरू करेगा। पूर्वांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल, मध्यमांचल, कैस्को की कुल वार्षिक राजस्व आवश्यकता लगभग 1 लाख 13923 करोड़ रुपये है। सभी बिजली कंपनियां लगभग 133,779 मिलियन यूनिट बिजली बेचेंगी। बहुवर्षीय टैरिफ विनियमन के अंतर्गत वार्षिक राजस्व आवश्यकता में विद्युत कम्पनियों द्वारा लाइन हानियों और ए.टी.एंड.सी. हानियों पर अभी तक कोई डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया है। कुल अंतर लगभग 9 से 10 हजार करोड़ रुपये के बीच है।
कंपनियों को ग्राहकों को 33,122 करोड़ रुपये वापस करने चाहिए: वर्मा
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि नियमानुसार इस वर्ष भी बिजली की दरें नहीं बढ़ाई जा सकतीं। बिजली निगमों पर उपभोक्ताओं का 33,122 करोड़ रुपए बकाया है। सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद मांग करेगी कि पहले कंपनियां ग्राहकों को 33,122 करोड़ रुपये का बकाया वापस करें। इसे मासिक बिजली बिल में वापस किया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिजली की दरें बढ़ने की बजाय घटेंगी।

