दशमी पर हवन-पूजन के साथ संपन्न होगा नवरात्र, हाथी पर माता की विदाई; मूर्ति विसर्जन के लिए घाटों पर बने आर्टिफिशियल तालाब
नवरात्रि के समापन के साथ दशमी के दिन दुर्गा पूजा पंडालों में हवन-पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु माता की प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे। इस दौरान घाटों पर भीड़ को व्यवस्थित रखने और जल प्रदूषण रोकने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल तालाब तैयार किए गए हैं। प्रशासन की ओर से विसर्जन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की तैयारियां की जा रही हैं।
हवन-पूजन के साथ संपन्न होंगे नवरात्र के अनुष्ठान
नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। दशमी के अवसर पर पूजा पंडालों में विशेष अनुष्ठान, हवन और आरती का आयोजन होगा। श्रद्धालु माता से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।
दशमी के दिन पूजा के समापन के साथ ही दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू होगी। पंडालों से प्रतिमाओं को श्रद्धा और उत्साह के साथ विसर्जन स्थलों तक ले जाया जाएगा।
हाथी पर माता की विदाई को लेकर धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार माता की विदाई हाथी पर होने की मान्यता को लेकर श्रद्धालुओं में चर्चा है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, माता के वाहन को शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इन्हें आस्था तथा परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
मूर्ति विसर्जन के लिए घाटों पर बने आर्टिफिशियल तालाब
दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान नदियों और प्राकृतिक जलस्रोतों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए घाटों पर कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। इन तालाबों में प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा सकेगा। इससे विसर्जन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है।
कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था से श्रद्धालुओं को निर्धारित स्थानों पर विसर्जन करने की सुविधा मिलेगी। प्रशासन की ओर से विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।
विसर्जन के दौरान सुरक्षा और सावधानी जरूरी
दशमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु विसर्जन जुलूसों में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में लोगों से निर्धारित मार्गों का पालन करने और प्रशासन के निर्देशों का ध्यान रखने की अपेक्षा की जाती है। बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें और विसर्जन के दौरान जलाशयों के किनारे सावधानी बरतें।
नवरात्रि के समापन पर हवन-पूजन, माता की विदाई और प्रतिमा विसर्जन के साथ धार्मिक उत्सव संपन्न होगा। कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था से विसर्जन को अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

