किसानों की सिंचाई समस्या को लेकर विधायक अनीता ने मंत्री को लिखा पत्र, योजनाओं को जल्द मंजूरी देने की मांग
राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के आदिवासी समाज की आस्था और बलिदान का प्रतीक मानगढ़ धाम को केंद्र सरकार ने फिलहाल राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने योग्य नहीं माना है। यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में एक लिखित जवाब के दौरान दी। यह जवाब आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर दिया गया।
राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग पर सरकार का जवाब
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग सरकार के सामने आई थी। हालांकि, संबंधित एजेंसियों द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह स्थल राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता। इसलिए इस संबंध में कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है।
केंद्र सरकार ने बताई यह वजह
सरकार के अनुसार, निरीक्षण में पाया गया कि मानगढ़ धाम पर बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण और विकास कार्य किए जा चुके हैं। इन बदलावों के कारण स्थल की पुरातात्विक विशेषताएं, प्रामाणिकता (Authenticity) और अखंडता (Integrity) प्रभावित हुई हैं। इसी आधार पर इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया।
मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व
मानगढ़ धाम को आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे अक्सर 'राजस्थान का जलियांवाला बाग' कहा जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में आदिवासियों ने अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के संघर्ष में बलिदान दिया था। हर वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु और आदिवासी समुदाय के लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
केंद्र सरकार के इस जवाब के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। सरकार के ताजा रुख के बाद इस मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

