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बिहार में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा फेरबदल, बीजेपी नेताओं की सुरक्षा बढ़ी, तेजस्वी यादव की घटी

बिहार में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा फेरबदल, बीजेपी नेताओं की सुरक्षा बढ़ी, तेजस्वी यादव की घटी

बिहार की राजनीति में एक बार फिर नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने सुरक्षा समीक्षा के बाद कई प्रमुख नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में संशोधन किया है। इस फैसले के तहत जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई नेताओं की सुरक्षा बढ़ाई गई है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी नेता नितिन नवीन की सुरक्षा को बढ़ाकर अब Z श्रेणी कर दिया गया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को भी Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे के आकलन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है।

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में कुछ नेताओं को संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए उनकी सुरक्षा बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। इसी क्रम में बीजेपी नेताओं की सुरक्षा में इजाफा किया गया है। Z श्रेणी की सुरक्षा के तहत संबंधित नेताओं को कई सुरक्षाकर्मी, बुलेटप्रूफ वाहन और 24 घंटे की निगरानी उपलब्ध कराई जाती है।

वहीं दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती किए जाने का फैसला सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला पूरी तरह से सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के आकलन पर आधारित है और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। तेजस्वी यादव की सुरक्षा किस श्रेणी में घटाई गई है, इसको लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था में हुए इस बदलाव को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। वहीं, बीजेपी नेताओं का तर्क है कि सुरक्षा पूरी तरह से खतरे की आशंका और खुफिया रिपोर्ट्स के आधार पर तय होती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेताओं की सुरक्षा में इस तरह के बदलाव अक्सर चुनावी माहौल और राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनज़र किए जाते हैं। बिहार में आने वाले समय में पंचायत से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारियों को देखते हुए नेताओं की गतिविधियां बढ़ने वाली हैं, ऐसे में सुरक्षा समीक्षा स्वाभाविक मानी जा रही है।

गौरतलब है कि बिहार में इससे पहले भी कई बार नेताओं की सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव हो चुका है। सरकार का कहना है कि आम जनता की सुरक्षा के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि सुरक्षा संसाधनों का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए।

इस तरह, बिहार में नेताओं की सुरक्षा को लेकर लिया गया यह फैसला आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रह सकता है। खासतौर पर तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती और बीजेपी नेताओं की सुरक्षा बढ़ाए जाने को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है।

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