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ई-केवाईसी में बड़ी लापरवाही: गया की वार्ड पार्षद शीला देवी को सरकारी रिकॉर्ड में किया गया मृत घोषित

ई-केवाईसी में बड़ी लापरवाही: गया की वार्ड पार्षद शीला देवी को सरकारी रिकॉर्ड में किया गया मृत घोषित

बिहार के गया जिले से सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गया नगर निगम की वार्ड पार्षद शीला देवी को ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया के दौरान सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि सक्रिय रूप से अपने पद पर कार्यरत भी हैं। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, शीला देवी पिछले करीब 15 वर्षों से विधवा पेंशन का लाभ ले रही हैं। हाल ही में पेंशन से जुड़ी ई-केवाईसी कराने के लिए वे एक साइबर कैफे पहुंचीं। वहीं जब ऑपरेटर ने उनका विवरण ऑनलाइन सिस्टम में डाला, तो सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत बताया जा रहा है। यह जानकारी मिलते ही शीला देवी हैरान रह गईं।

शीला देवी ने बताया कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित रूप से वार्ड पार्षद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसके बावजूद सरकारी कागजातों में उनका नाम मृतकों की सूची में दर्ज होना न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि बेहद चिंताजनक भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक जनप्रतिनिधि के साथ ऐसी गलती हो सकती है, तो आम लोगों का क्या हाल होता होगा।

इस मामले को लेकर शीला देवी ने जिलाधिकारी (डीएम) से मुलाकात कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि किसी बड़ी लापरवाही या गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

वहीं मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चंदौती प्रखंड के बीडीओ ने कहा है कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शीला देवी के रिकॉर्ड को शीघ्र दुरुस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि ई-केवाईसी और डिजिटल डाटा एंट्री के दौर में इस तरह की गलतियां आम जनता के लिए बड़ी परेशानी बन सकती हैं। खासकर पेंशन, राशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में ऐसी त्रुटियां लाभुकों को उनके हक से वंचित कर देती हैं।

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