लग्जरी गंगा विलास क्रूज गंगा में कम पानी होने पर पटना से ही वापस लौटा, विदेशी पर्यटक बस से पहुंचे वाराणसी
नवंबर में कोलकाता से वाराणसी के लिए निकला लग्ज़री गंगा विलास क्रूज़, पानी का लेवल कम होने की वजह से पटना लौटना पड़ा। पटना और वाराणसी के बीच कई जगहों पर गंगा नदी में पानी का लेवल कम होने की वजह से आगे का सफ़र नामुमकिन हो गया। क्रूज़ में सवार 30 विदेशी टूरिस्ट को सड़क के रास्ते वाराणसी ले जाया गया।
गंगा विलास क्रूज़ 12 नवंबर को कोलकाता से वाराणसी के लिए निकला था। क्रूज़ में जर्मनी, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड स्टेट्स के 30 टूरिस्ट शामिल थे। क्रूज़ के दौरान कुल 15 स्टॉप प्लान किए गए थे, जिससे टूरिस्ट को गंगा नदी के किनारे अलग-अलग जगहों का अनुभव करने का मौका मिला।
हालांकि, पानी का लेवल कम होने की वजह से क्रूज़ को पटना में रोकना पड़ा। यह स्थिति टूरिस्ट के लिए निराशाजनक थी, जो अपनी ट्रिप का मज़ा लेने से चूक गए। टूरिस्ट को सड़क के रास्ते वाराणसी ले जाने का इंतज़ाम किया गया ताकि वे तय समय के मुताबिक अपनी यात्रा जारी रख सकें।
गंगा विलास क्रूज़ का मकसद न सिर्फ़ टूरिस्ट को गंगा नदी की सुंदरता का अनुभव कराना था, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं से भी परिचित कराना था। ऐसे क्रूज़ टूरिस्ट को लोकल खाने, कला और क्राफ़्ट का अनुभव करने का भी मौका देते हैं।
क्लाइमेट चेंज और पानी के लेवल में उतार-चढ़ाव ऐसे क्रूज़ के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। टूरिस्ट की सेफ्टी और आराम को ध्यान में रखते हुए, एडमिनिस्ट्रेशन ने क्रूज़ को जारी न रखने का फैसला किया। इस घटना से यह भी पता चला कि टूरिस्ट के लिए पानी का सफर कितना रोमांचक हो सकता है, लेकिन साथ ही, पानी की सतह की हालत पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
गंगा विलास क्रूज़ एक अहम अनुभव था, जिसने टूरिस्ट को भारतीय संस्कृति और गंगा नदी की अहमियत से जोड़ने की कोशिश की। हालांकि, गंगा पर साल भर चलने वाले क्रूज़ के ऑपरेशन का खुलासा करने वाली इस रिपोर्ट ने डिपार्टमेंट की नीयत पर भी सवाल उठाए हैं।

