'विरोध की जगह गालियां और जातीय उन्माद ने ली' आनंद मोहन बोले- सीएम सम्राट चौधरी को जनता की नब्ज समझनी चाहिए; शराबबंदी की समीक्षा जरूरी
बिहार की राजनीति में पूर्व सांसद आनंद मोहन के बयान से एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उन्होंने राज्य के मौजूदा राजनीतिक माहौल, जातीय उन्माद और शराबबंदी नीति को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जनता की नब्ज समझने की सलाह दी है। आनंद मोहन ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध की जगह गाली-गलौज और जातीय उन्माद का माहौल बनना चिंता का विषय है।
आनंद मोहन ने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं को जनता की वास्तविक समस्याओं को समझने की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे आम लोगों के बीच जाकर उनकी परेशानियों और अपेक्षाओं को समझें। उनका कहना है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि जनता किन मुद्दों को सबसे अधिक महत्वपूर्ण मान रही है और उन पर किस तरह काम किया जा सकता है।
उन्होंने बिहार में लागू शराबबंदी नीति की समीक्षा की जरूरत भी बताई। आनंद मोहन के मुताबिक, किसी भी नीति का उद्देश्य जनता के हित में व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए। यदि किसी नीति के लागू होने के बाद उसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव सामने आते हैं तो समय-समय पर उसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
शराबबंदी को लेकर बिहार में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। समर्थक इसे सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हैं, जबकि आलोचक इसके क्रियान्वयन, अवैध शराब और उससे जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। आनंद मोहन ने भी नीति की समीक्षा की जरूरत बताते हुए सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा है।
आनंद मोहन ने राजनीतिक विरोध के बदलते स्वरूप पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध तथ्यों और मुद्दों के आधार पर होना चाहिए। यदि राजनीतिक बहस व्यक्तिगत आरोपों, गाली-गलौज और जातीय भावनाओं को भड़काने तक सीमित हो जाए तो इससे समाज में तनाव बढ़ सकता है।
उनके बयान को बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के सामने विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कई सवाल हैं। ऐसे में आनंद मोहन का यह बयान सरकार की नीतियों पर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर सकता है।
हालांकि, शराबबंदी की समीक्षा और राजनीतिक माहौल को लेकर आनंद मोहन की टिप्पणियों पर सरकार या अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है।

