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कांग्रेस की तैयारियों के बीच अंदरूनी कलह, प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज़ गुट में बढ़ता असंतोष

कांग्रेस की तैयारियों के बीच अंदरूनी कलह: प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज़ गुट में बढ़ता असंतोष

प्रदेश कांग्रेस इन दिनों आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटी हुई है। रणनीति तैयार की जा रही है, संगठन को मजबूती दी जा रही है, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति और प्रशिक्षण पर फोकस किया जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व लगातार दौरे कर रहा है, कार्यकर्ताओं की बैठकें ली जा रही हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी को मज़बूत करने का प्रयास चल रहा है। लेकिन इन सबके बीच पार्टी के भीतर एक ऐसा धड़ा भी सक्रिय है जो प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज़ दिखाई दे रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह असंतुष्ट गुट पार्टी के प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष की निर्णय लेने की प्रक्रिया से असहमत है। इन नेताओं का कहना है कि महत्वपूर्ण निर्णय कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हैं और जमीनी कार्यकर्ताओं या अनुभवी नेताओं से कोई परामर्श नहीं लिया जा रहा है। इससे न केवल वरिष्ठ नेताओं का मनोबल टूट रहा है, बल्कि基层 कार्यकर्ताओं में भी भ्रम और नाराजगी की स्थिति बनी हुई है।

पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रदेश नेतृत्व केवल फोटो-ऑप और सोशल मीडिया प्रचार तक सीमित है, जबकि संगठन की असल स्थिति कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल सभाएं और बयानबाज़ी करके चुनाव नहीं जीते जा सकते, बल्कि जमीनी सच्चाई को समझकर रणनीति बनानी होगी।

वहीं, इस नाराजगी को लेकर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि पार्टी एकजुट है और सभी नेताओं की राय का सम्मान किया जा रहा है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि चुनावी तैयारियों को लेकर सभी जिलों में समन्वय बैठकें की जा रही हैं और सुझावों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की वजह से ऐसे आरोप लगा रहे हैं, जिससे पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश हो रही है।

हालांकि, यह साफ है कि अगर समय रहते इन नाराज नेताओं को विश्वास में नहीं लिया गया और उनकी चिंताओं को दूर नहीं किया गया, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। प्रदेश कांग्रेस पहले ही कई बार गुटबाज़ी और आपसी खींचतान के कारण चुनावों में नुकसान उठा चुकी है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आगामी चुनावों में एकजुटता के बजाय असंतोष और बिखराव सामने आ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी तैयारियों के साथ-साथ कांग्रेस को अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाना होगा। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच संवाद की खाई को पाटना जरूरी है। वरना जोश के साथ शुरू हुई ये तैयारियां अंत में विफलता में तब्दील हो सकती हैं।

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