भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा अलर्ट, अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए हाई सिक्योरिटी जोन घोषित
भारत-नेपाल की खुली सीमा एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। अवैध व्यापार, मानव तस्करी, नशीले पदार्थ, नकली करेंसी, सोना और विदेशी सामान की तस्करी के लिए यह सीमा लंबे समय से कुख्यात रही है। हाल ही में मिली खुफिया जानकारी के अनुसार अब जाली दस्तावेजों के सहारे अवैध घुसपैठ भी बढ़ रही है, जिसे गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इन हालातों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने सीमा के संवेदनशील इलाकों को हाई सिक्योरिटी जोन घोषित कर दिया है। इस निर्णय का मकसद न केवल अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना है, बल्कि सीमा पार सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करना भी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-नेपाल की खुली सीमा की लंबाई लगभग 1,751 किलोमीटर है और कई जगहों पर प्राकृतिक और मानव निर्मित बाधाओं का अभाव है। इसी कारण यह क्षेत्र अवैध गतिविधियों और तस्करी के लिए सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता रहा है।
रक्सौल बॉर्डर पर सुरक्षा को देखते हुए सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 24 घंटे गश्त बढ़ा दी गई है। गश्त में आधुनिक निगरानी उपकरणों, ड्रोन और मोबाइल पेट्रोलिंग यूनिट्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, सीमा पर निगरानी बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय भी मजबूत किया गया है।
SSB के अधिकारियों ने बताया कि जाली दस्तावेजों के माध्यम से अवैध घुसपैठ रोकने के लिए कड़ी जांच और पहचान तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारी यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और सीमा पार से आने-जाने वाले लोगों पर विशेष ध्यान रखा जाएगा।
गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस कदम से सीमा के भीतर तस्करी के नेटवर्क और अवैध गतिविधियों को तोड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल सरकार के साथ सहयोग और साझा निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-नेपाल की खुली सीमा पर निगरानी बढ़ाने से न केवल सुरक्षा जोखिम कम होंगे, बल्कि व्यापार और स्थानीय लोगों के लिए पारदर्शी और सुरक्षित सीमा पार प्रणाली सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि हालात को देखते हुए उन्हें उम्मीद है कि सुरक्षा व्यवस्था सख्त होने से अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी और आम नागरिकों और व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत-नेपाल सीमा अब सिर्फ खुली सीमा नहीं बल्कि सुरक्षा और निगरानी का संवेदनशील क्षेत्र बन गई है। आने वाले समय में गश्त, आधुनिक तकनीक और दोनों देशों के सहयोग से अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखने की कोशिश जारी रहेगी।

