बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध तस्करी जारी, 2025 में 36.3 लाख लीटर शराब जब्त
बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब की तस्करी पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। शराब माफिया नए-नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं, हालांकि पुलिस और प्रशासन की सख्ती के चलते लगातार बड़ी कार्रवाई भी सामने आ रही है। साल 2025 में अब तक बिहार पुलिस ने शराबबंदी कानून के तहत 36.3 लाख लीटर से अधिक अवैध शराब जब्त की है, जबकि इस मामले में 1.25 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जब्त की गई शराब में विदेशी शराब के साथ-साथ देसी शराब भी बड़ी मात्रा में शामिल है। अवैध शराब का निर्माण, भंडारण और परिवहन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में किया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर कई अवैध भट्ठियों को ध्वस्त किया है और शराब तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों को भी जब्त किया गया है।
शराबबंदी कानून के उल्लंघन के मामलों में लगातार बढ़ रही गिरफ्तारियों से यह साफ है कि अवैध शराब कारोबार का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। तस्कर पड़ोसी राज्यों से शराब की सप्लाई कर रहे हैं और सीमावर्ती जिलों में यह समस्या ज्यादा गंभीर बनी हुई है। इसे देखते हुए बिहार पुलिस ने सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है और विशेष चेक पोस्ट बनाकर वाहनों की सघन जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शराब तस्करी के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और मुखबिर तंत्र को मजबूत किया गया है। साथ ही अवैध शराब कारोबार से अर्जित संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई भी तेज कर दी गई है, ताकि माफियाओं की आर्थिक रीढ़ तोड़ी जा सके।
हालांकि शराबबंदी कानून के चलते राज्य में सामाजिक बदलाव के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन अवैध तस्करी की लगातार घटनाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। जहरीली शराब से होने वाली मौतों की घटनाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं, जिससे कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठते हैं।
सरकार का कहना है कि शराबबंदी को लेकर उसकी नीति स्पष्ट है और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

