बिहार में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूल बसों में ओवरलोडिंग कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएनजी ऑटो में अधिकतम 4 बच्चों और बिक्रम ऑटो में अधिकतम 7 बच्चों को अनुमति दी जाएगी। यदि चालक निर्धारित सीमा से अधिक बच्चों को ले जाएगा तो उसे प्रति अतिरिक्त बच्चे 200 रुपये का जुर्माना देना होगा। यातायात पुलिस यह कार्रवाई ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकती है।
सख्त नियमों के साथ चलेंगे स्कूल ऑटो
बच्चों को ले जाने वाले ड्राइवरों को अब कई नियमों का पालन करना होगा। यदि यातायात पुलिस किसी वाहन को रोकती है तो वाहन चालकों को परमिट, फिटनेस प्रमाण पत्र, प्रदूषण प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस दिखाना अनिवार्य होगा। केवल सुरक्षा मानकों का अनुपालन करने वाले वाहनों को ही बच्चों के परिवहन की अनुमति दी जाएगी। वहीं, ई-रिक्शा से स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
अब सभी स्कूल वाहनों में जीपीएस और सीसीटीवी अनिवार्य कर दिया गया है।
बच्चों की निगरानी और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने स्कूल वैन, बस और ऑटो में जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, ऑटो में सिर्फ जीपीएस ही लगेगा, कैमरे लगाने की जरूरत नहीं होगी। जीपीएस और कैमरों के जरिए ट्रैफिक एसपी, परिवहन विभाग और जिला परिवहन अधिकारी वाहनों की लाइव मॉनिटरिंग कर सकेंगे।
'ऑन-स्कूल ड्यूटी' बोर्ड अनिवार्य होगा
अब स्कूल सेवा में लगे सभी वाहनों के आगे और पीछे "ऑन-स्कूल ड्यूटी" बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। यदि वाहन नियमित यात्रियों को ले जाने लगेगा तो चालक इस बोर्ड को हटा सकेगा। इसके अलावा, यदि स्कूल द्वारा किसी ऑपरेटर से बस किराये पर ली जाती है, तो उस पर भी स्पष्ट रूप से "ऑन-स्कूल ड्यूटी" लिखा होना अनिवार्य होगा।

