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विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में हाइड्रो-क्लीनिंग कार्य शुरू, संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग

विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में हाइड्रो-क्लीनिंग कार्य शुरू, संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग

विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को बनाए रखने के लिए हाइड्रो-क्लीनिंग कार्य शुरू कर दिया गया है। इस संरक्षण कार्य का नेतृत्व थाईलैंड के स्वयंसेवी समूह "चोबथम" कर रहा है, और इसे बीटीएमसी (बोधगया टाउन मैनेजमेंट कमेटी) और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की कड़ी निगरानी में अंजाम दिया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि इस कार्य में बांस के मचान का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मंदिर की संरचना और पवित्रता सुरक्षित रहे। हाइड्रो-क्लीनिंग तकनीक का इस्तेमाल मंदिर की दीवारों और मूर्तियों को किसी भी रासायनिक प्रभाव या क्षति के बिना साफ करने के लिए किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से न केवल महाबोधि मंदिर की ऐतिहासिक सुंदरता और संरचनात्मक मजबूती बनी रहेगी, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सकेगा।

बीटीएमसी के अध्यक्ष ने कहा, “महाबोधि मंदिर सिर्फ बोधगया का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है। इस हाइड्रो-क्लीनिंग कार्य के माध्यम से हम इसे और अधिक संरक्षित और सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहे हैं। थाईलैंड के स्वयंसेवी समूह का सहयोग इस पहल में अंतरराष्ट्रीय समर्थन और आस्था का प्रतीक है।”

ASI के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी काम सख्त मानकों के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर की दीवारों, स्तूपों और मूर्तियों की संरचनात्मक स्थिति को नुकसान पहुँचाए बिना यह कार्य संपन्न किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पवित्र स्थल की आध्यात्मिकता को बनाए रखना इस परियोजना की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महाबोधि मंदिर का संरक्षण केवल स्थानीय या राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। थाईलैंड जैसे देशों के स्वयंसेवी समूहों का इसमें सहयोग न केवल तकनीकी दृष्टि से उपयोगी है, बल्कि यह वैश्विक सांस्कृतिक और धार्मिक समझ का प्रतीक भी है।

स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मंदिर की पवित्रता और सौंदर्य को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रेरणादायक है। उनका कहना है कि इस तरह के संरक्षण प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे।

महाबोधि मंदिर में यह हाइड्रो-क्लीनिंग कार्य संरक्षण और आस्था का अनूठा संगम है। इसके जरिए यह संदेश भी मिलता है कि इतिहास और धर्म का संरक्षण केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक सहभागिता से ही सफलतापूर्वक संभव है।

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