दारोगा बहाली परीक्षा में हाइटेक नकल की जांच तेज, जैमर लगाने वाली एजेंसी भी ईओयू के रडार पर
बिहार में इस साल मई में आयोजित हुई दारोगा बहाली मुख्य परीक्षा को लेकर जांच का दायरा अब और बढ़ गया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने परीक्षा में कथित हाइटेक नकल के मामले की जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी अब केवल अभ्यर्थियों और परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाने वाली वेंडर एजेंसी की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, दारोगा बहाली मुख्य परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका के बाद ईओयू ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई तकनीकी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। इसी क्रम में अब परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए जैमर की व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
ईओयू यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए जैमर सही तरीके से काम कर रहे थे या नहीं। इसके अलावा जैमर लगाने वाली एजेंसी की प्रक्रिया, उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी व्यवस्था को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने भी ईओयू से संपर्क करना शुरू कर दिया है। कई अभ्यर्थी परीक्षा से जुड़ी जानकारी और संभावित गड़बड़ी को लेकर जांच एजेंसी के सामने अपनी बातें रख रहे हैं। ईओयू सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की पड़ताल कर रही है।
जांच एजेंसी हाइटेक नकल के संभावित तरीकों की भी जांच कर रही है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, संचार माध्यमों के इस्तेमाल और परीक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही की भूमिका को देखा जा रहा है।
दारोगा बहाली जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार और परीक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होती है। इसी को देखते हुए ईओयू तकनीकी और मानवीय दोनों पहलुओं से जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि परीक्षा में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल ईओयू की टीम परीक्षा केंद्रों से जुड़े सभी पक्षों और संबंधित एजेंसियों से जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

