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बिहार में आधा मानसून रहा फीका: 31 जुलाई तक सामान्य से 42% कम बारिश, खेती और जलस्रोतों पर बढ़ी चिंता

बिहार में आधा मानसून रहा फीका: 31 जुलाई तक सामान्य से 42% कम बारिश, खेती और जलस्रोतों पर बढ़ी चिंता

बिहार में इस बार मानसून का पहला आधा सीजन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के 31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 291.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में 503.8 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी। यानी बिहार में अब तक सामान्य से करीब 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

सामान्य से काफी कम हुई बारिश

मानसून की शुरुआत से लेकर जुलाई के अंत तक राज्य में वर्षा का प्रदर्शन कमजोर रहा है। अधिकांश जिलों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से मौसम का संतुलन बिगड़ा हुआ है। कई इलाकों में लगातार सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

खेती पर पड़ रहा असर

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों की खेती पर दिखाई दे रहा है। धान की रोपाई कई जिलों में प्रभावित हुई है, जबकि जिन क्षेत्रों में रोपाई हो चुकी है, वहां भी पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेती को नुकसान से बचाया जा सके।

जलस्रोतों पर भी बढ़ा दबाव

कम वर्षा का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। तालाब, आहर, पोखर और अन्य जलस्रोतों में भी पानी का स्तर अपेक्षा से कम बना हुआ है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पेयजल और सिंचाई की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

अगस्त की बारिश पर टिकी उम्मीदें

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और अगस्त में अच्छी बारिश की संभावना बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होती है तो बारिश की कमी की भरपाई काफी हद तक हो सकती है और खरीफ फसलों को राहत मिलेगी।

प्रशासन की नजर हालात पर

राज्य सरकार और संबंधित विभाग वर्षा की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कृषि विभाग किसानों को मौसम के अनुसार खेती संबंधी सलाह जारी कर रहा है, ताकि कम बारिश की स्थिति में भी फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

फिलहाल, 31 जुलाई तक के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार में मानसून का पहला आधा सीजन अपेक्षा से कमजोर रहा है। अब किसानों से लेकर आम लोगों तक की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हैं, जिससे सूखे जैसे हालात से राहत मिलने की उम्मीद है।

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