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बिहार में स्टेट हाईवे टोल टैक्स पर सरकार बैकफुट पर, फैसले की समीक्षा की तैयारी; कैबिनेट मंजूरी के बाद उठे सवाल

बिहार में स्टेट हाईवे टोल टैक्स पर सरकार बैकफुट पर, फैसले की समीक्षा की तैयारी; कैबिनेट मंजूरी के बाद उठे सवाल

बिहार सरकार स्टेट हाईवे और राज्य के पुलों पर टोल टैक्स वसूली के फैसले को लेकर बैकफुट पर आती नजर आ रही है। कैबिनेट बैठक में राज्य के स्टेट हाईवे और पुलों पर सभी श्रेणी के वाहनों से टोल टैक्स लेने के नियमों को मंजूरी दी गई थी। लेकिन फैसले के बाद उठे विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया को देखते हुए सरकार अब इस मामले पर पुनर्विचार कर सकती है।

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने सड़क आधारभूत संरचना को मजबूत करने और रखरखाव के लिए स्टेट हाईवे और पुलों पर टोल वसूली की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया था। इसके तहत छोटे-बड़े सभी प्रकार के वाहनों से निर्धारित दरों के अनुसार शुल्क लेने का प्रावधान किया गया था।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद शुरू हुआ विरोध

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद टोल टैक्स लागू करने के फैसले को लेकर आम लोगों और विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए गए। लोगों का कहना था कि पहले से ही महंगाई और बढ़ते खर्चों के बीच अतिरिक्त टोल टैक्स का बोझ आम जनता पर पड़ेगा।वहीं, राजनीतिक दलों ने भी सरकार के इस फैसले पर निशाना साधा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की तैयारी कर रही है। बढ़ते विरोध के बीच सरकार को अपने फैसले पर सफाई देनी पड़ी।

सरकार कर सकती है नियमों में बदलाव

सूत्रों के अनुसार, सरकार अब टोल टैक्स व्यवस्था के नियमों में बदलाव या कुछ श्रेणियों के वाहनों को राहत देने पर विचार कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।सरकार का तर्क है कि सड़कों और पुलों के बेहतर रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। टोल से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में किया जाना है।

जनता की नजर सरकार के अगले कदम पर

स्टेट हाईवे टोल टैक्स को लेकर अब लोगों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। यदि सरकार नियमों में संशोधन करती है तो आम वाहन चालकों को राहत मिल सकती है।फिलहाल बिहार में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद शुरू हुआ विवाद सरकार के लिए चुनौती बन गया है और अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या अंतिम फैसला लेती है।

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