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क्लासरूम से क्राइम वर्ल्ड तक: कैसे एक अंग्रेजी शिक्षक बना शातिर बैंक डकैत अमन शुक्ला

sपुलिस रिकॉर्ड में अमन शुक्ला का नाम भले ही आज एक शातिर बैंक डकैत गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में दर्ज हो, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले उसकी पहचान एक अंग्रेजी शिक्षक (English Teacher) के तौर पर थी। एक ऐसा शिक्षक, जो कभी छात्रों को भविष्य संवारने की सीख देता था, वही आगे चलकर बैंक लूट की साजिशें रचने लगा।  पुलिस जांच में सामने आया है कि अमन शुक्ला पढ़ाई में अच्छा था और अंग्रेजी भाषा पर उसकी मजबूत पकड़ थी। उसने कुछ समय तक निजी कोचिंग संस्थानों में अंग्रेजी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई। उसके जानने वाले बताते हैं कि वह तेज दिमाग और आत्मविश्वासी स्वभाव का था।  लेकिन धीरे-धीरे उसकी जिंदगी ने एक अलग मोड़ ले लिया।  कैसे बदली राह?  पुलिस के अनुसार, नौकरी में अस्थिरता, आर्थिक तंगी और जल्द अमीर बनने की चाह ने अमन को अपराध की ओर धकेल दिया। शुरुआती दिनों में वह छोटे-मोटे अपराधियों के संपर्क में आया और फिर संगठित बैंक लूट गिरोह से जुड़ गया। अपनी पढ़ाई, प्लानिंग और अंग्रेजी ज्ञान का इस्तेमाल उसने अपराध को अंजाम देने में किया।  अमन बैंक लूट की रेकी, टाइमिंग, सुरक्षा व्यवस्था और भागने के रूट की बारीकी से योजना बनाता था। पुलिस का कहना है कि गिरोह की कई वारदातें इतनी सटीक थीं कि लंबे समय तक पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला।  शिक्षक से मास्टरमाइंड तक  जांच में सामने आया कि अमन शुक्ला केवल लूट में शामिल नहीं था, बल्कि वह पूरे गिरोह का रणनीतिक दिमाग था। वह अपने साथियों को निर्देश देता, कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करता और वारदात के बाद मोबाइल और लोकेशन बदलने की रणनीति पहले से तय रखता था।  एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “अमन शुक्ला पढ़ा-लिखा और बेहद चालाक था। उसकी यही काबिलियत उसे सामान्य अपराधियों से अलग बनाती थी।”  गिरफ्तारी और खुलासे  जब पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के जरिए अमन को गिरफ्तार किया, तो उसके दोहरे जीवन का खुलासा हुआ। पुलिस को उसके पास से लूट से जुड़े नक्शे, नोट्स और डिजिटल सबूत मिले, जो उसकी प्लानिंग क्षमता को दर्शाते हैं।  गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में अमन ने कई बैंक लूट की वारदातों में अपनी भूमिका स्वीकार की। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने कितनी वारदातों को अंजाम दिया और लूटी गई रकम कहां-कहां खपाई गई।

पुलिस रिकॉर्ड में अमन शुक्ला का नाम भले ही आज एक शातिर बैंक डकैत गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में दर्ज हो, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले उसकी पहचान एक अंग्रेजी शिक्षक (English Teacher) के तौर पर थी। एक ऐसा शिक्षक, जो कभी छात्रों को भविष्य संवारने की सीख देता था, वही आगे चलकर बैंक लूट की साजिशें रचने लगा।

पुलिस जांच में सामने आया है कि अमन शुक्ला पढ़ाई में अच्छा था और अंग्रेजी भाषा पर उसकी मजबूत पकड़ थी। उसने कुछ समय तक निजी कोचिंग संस्थानों में अंग्रेजी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई। उसके जानने वाले बताते हैं कि वह तेज दिमाग और आत्मविश्वासी स्वभाव का था।

लेकिन धीरे-धीरे उसकी जिंदगी ने एक अलग मोड़ ले लिया।

कैसे बदली राह?

पुलिस के अनुसार, नौकरी में अस्थिरता, आर्थिक तंगी और जल्द अमीर बनने की चाह ने अमन को अपराध की ओर धकेल दिया। शुरुआती दिनों में वह छोटे-मोटे अपराधियों के संपर्क में आया और फिर संगठित बैंक लूट गिरोह से जुड़ गया। अपनी पढ़ाई, प्लानिंग और अंग्रेजी ज्ञान का इस्तेमाल उसने अपराध को अंजाम देने में किया।

अमन बैंक लूट की रेकी, टाइमिंग, सुरक्षा व्यवस्था और भागने के रूट की बारीकी से योजना बनाता था। पुलिस का कहना है कि गिरोह की कई वारदातें इतनी सटीक थीं कि लंबे समय तक पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला।

शिक्षक से मास्टरमाइंड तक

जांच में सामने आया कि अमन शुक्ला केवल लूट में शामिल नहीं था, बल्कि वह पूरे गिरोह का रणनीतिक दिमाग था। वह अपने साथियों को निर्देश देता, कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करता और वारदात के बाद मोबाइल और लोकेशन बदलने की रणनीति पहले से तय रखता था।

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक,
“अमन शुक्ला पढ़ा-लिखा और बेहद चालाक था। उसकी यही काबिलियत उसे सामान्य अपराधियों से अलग बनाती थी।”

गिरफ्तारी और खुलासे

जब पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के जरिए अमन को गिरफ्तार किया, तो उसके दोहरे जीवन का खुलासा हुआ। पुलिस को उसके पास से लूट से जुड़े नक्शे, नोट्स और डिजिटल सबूत मिले, जो उसकी प्लानिंग क्षमता को दर्शाते हैं।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में अमन ने कई बैंक लूट की वारदातों में अपनी भूमिका स्वीकार की। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने कितनी वारदातों को अंजाम दिया और लूटी गई रकम कहां-कहां खपाई गई।

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