रोहतास में फर्जी वेबसाइट के जरिए करोड़ों की ठगी, पुलिस ने गिरोह का किया पर्दाफाश
बिहार के रोहतास जिले में पुलिस ने एक बड़े ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। इस गिरोह में एक ही परिवार के कई सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी रौशन कुमार कश्यप को हरियाणा से गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह ने एक नेटवर्किंग कंपनी के नाम पर लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया और इस बहाने करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की।
पुलिस का कहना है कि गिरोह ने अपनी फर्जी वेबसाइट के माध्यम से निवेशकों को पेशेवर और भरोसेमंद दिखाया। इसमें आकर्षक रिटर्न और कम जोखिम का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाया गया। कई पीड़ितों ने पुलिस को शिकायत दी कि उन्होंने सोच-समझकर निवेश किया था, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि यह पूरी योजना धोखाधड़ी पर आधारित थी।
पुलिस ने बताया कि रौशन कुमार कश्यप और उसके परिवार के अन्य सदस्य ठगी के इस जाल में सक्रिय थे। उन्होंने कई लोगों को अलग-अलग योजनाओं में निवेश करने के लिए उकसाया और फिर पैसे हड़प लिए। गिरोह ने फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके अपनी पहचान छुपाई और लोगों को विश्वास में लिया।
पुलिस अधिकारी ने कहा, “रौशन कुमार कश्यप को हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। इस गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है। हमने पीड़ितों से संपर्क साधकर उनके निवेश की रकम की रिकवरी के उपाय भी शुरू कर दिए हैं।”
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। वे बताते हैं कि लोग अक्सर आकर्षक रिटर्न और भरोसेमंद दिखने वाली वेबसाइटों के लालच में आकर फंस जाते हैं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी निवेश से पहले पूरी तरह जांच कर लें और केवल मान्यता प्राप्त कंपनियों और संस्थानों में ही निवेश करें। उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
रोहतास जिले में इस गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस ने बताया कि वे डिजिटल फोरेंसिक और तकनीकी जांच के माध्यम से अन्य फर्जी वेबसाइटों की भी पहचान कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से इलाके में लोगों के विश्वास को बहाल करने और धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी।
इस मामले ने बिहार में डिजिटल और निवेश धोखाधड़ी के प्रति चेतावनी को और भी मजबूत किया है। पुलिस का दावा है कि आने वाले समय में ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाएगी।

