भागलपुर में बाढ़ के पानी में डूबे स्कूल: घुटने भर पानी से होकर क्लास तक पहुंच रहे बच्चे, अभिभावक कर रहे छुट्टी की मांग
बिहार के भागलपुर में बाढ़ की स्थिति ने आम जनजीवन के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई पर भी असर डाला है। जिले के कई इलाकों में बाढ़ का पानी स्कूल परिसरों और आसपास की सड़कों तक पहुंच गया है। ऐसे में बच्चे घुटने भर पानी से होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। पानी के बीच से होकर स्कूल जाने के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाढ़ का पानी कई स्कूलों के आसपास जमा है। स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते भी पानी में डूबे हुए हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर स्कूलों में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। छोटे बच्चे अपने अभिभावकों के साथ या समूह में पानी पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं। पानी की गहराई अधिक होने के कारण उन्हें कपड़े और स्कूल बैग संभालकर आगे बढ़ना पड़ रहा है।
बारिश और बाढ़ के कारण जलजमाव की स्थिति लगातार बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़क और निचले इलाकों में पानी जमा होने से आवाजाही प्रभावित है। ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को इस तरह पानी के बीच से स्कूल भेजना जोखिम भरा है। उनका कहना है कि बाढ़ का पानी दूषित भी हो सकता है और इसमें जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है।
अभिभावकों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जब तक बाढ़ का पानी कम नहीं हो जाता, तब तक प्रभावित स्कूलों में छुट्टी घोषित की जाए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। पढ़ाई कुछ दिनों के लिए प्रभावित हो सकती है, लेकिन बच्चों को खतरे में डालकर स्कूल भेजना उचित नहीं है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जलजमाव के कारण स्कूल परिसर में साफ-सफाई की समस्या पैदा हो सकती है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में स्कूल खुलने से पहले परिसर और रास्तों की स्थिति की जांच करना जरूरी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, स्कूलों को लेकर अभिभावक अब स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक बच्चों के स्कूल आने-जाने के रास्ते सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक ऑनलाइन पढ़ाई या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
फिलहाल अभिभावकों की नजर प्रशासन और शिक्षा विभाग के फैसले पर है। बाढ़ के बीच स्कूल जाने को मजबूर बच्चों की तस्वीरें और स्थिति स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित स्कूलों के संबंध में जल्द फैसला लिया जाना चाहिए।

