Samachar Nama
×

‘पहले हग किया, फिर चेस्ट पर टच करने लगे’, छात्रा का आरोप- डायरेक्टर हॉस्टल की लड़कियों से करते हैं गलत हरकत; ऑफिस बुलाकर सेक्स-प्रेग्नेंसी पर बात

‘पहले हग किया, फिर चेस्ट पर टच करने लगे’, छात्रा का आरोप- डायरेक्टर हॉस्टल की लड़कियों से करते हैं गलत हरकत; ऑफिस बुलाकर सेक्स-प्रेग्नेंसी पर बात

हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा ने संस्थान के डायरेक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का कहना है कि डायरेक्टर ने पहले उसे गले लगाया और इसके बाद उसके शरीर को गलत तरीके से छूने की कोशिश की। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि डायरेक्टर हॉस्टल में रहने वाली अन्य लड़कियों के साथ भी आपत्तिजनक व्यवहार करते हैं। मामले में छात्रा के बयान सामने आने के बाद संस्थान में हड़कंप मचा हुआ है।

छात्रा के मुताबिक, डायरेक्टर ने उसे किसी काम के बहाने अपने ऑफिस में बुलाया था। बातचीत के दौरान कथित तौर पर उन्होंने निजी और आपत्तिजनक विषयों पर बात करना शुरू कर दिया। छात्रा का आरोप है कि डायरेक्टर सेक्स और प्रेग्नेंसी जैसी बातें करने लगे। इसके बाद उनका व्यवहार और ज्यादा असहज करने वाला हो गया। छात्रा ने दावा किया कि शुरुआत में उन्होंने उसे हग किया और फिर चेस्ट पर टच करने की कोशिश की।

छात्रा ने आरोप लगाया कि यह सिर्फ उसके साथ हुई घटना नहीं है। उसके मुताबिक, हॉस्टल में रहने वाली कई लड़कियां डायरेक्टर के व्यवहार से परेशान हैं। उसने दावा किया कि डायरेक्टर लड़कियों को अलग-अलग बहाने से ऑफिस में बुलाते हैं और उनके साथ आपत्तिजनक बातचीत करते हैं। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल की कुछ लड़कियों के साथ यौन शोषण किया गया है।

मामला सामने आने के बाद छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं और उनके परिजनों में चिंता का माहौल है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। जांच के दौरान छात्रा के बयान, अन्य छात्राओं के आरोप और उपलब्ध साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

ऐसे मामलों में शिकायत सामने आने के बाद पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी की भूमिका अहम हो जाती है। यदि आरोपों के संबंध में शिकायत या एफआईआर दर्ज होती है तो जांच के दौरान संबंधित लोगों से पूछताछ, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच और अन्य गवाहों के बयान लिए जा सकते हैं।

फिलहाल डायरेक्टर पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। आरोप साबित होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

मामले ने हॉस्टल और शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संस्थानों की जिम्मेदारी है कि छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाए और किसी भी शिकायत पर बिना देरी के निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्राओं का कहना है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

Share this story

Tags