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बिहार MLC चुनाव से पहले महागठबंधन में घमासान, 4 सीटों पर RJD-कांग्रेस आमने-सामने

बिहार MLC चुनाव से पहले महागठबंधन में घमासान, 4 सीटों पर RJD-कांग्रेस आमने-सामने

बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर उलझ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच कई सीटों पर सहमति नहीं बन सकी है। दोनों दलों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे गठबंधन के अंदर चुनावी तालमेल पर सवाल उठने लगे हैं। मौजूदा स्थिति में चार सीटों पर RJD और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने 1 अक्टूबर को पांच सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। इनमें पटना स्नातक से डॉ. असदुल्लाह खान, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक, कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा शिक्षक से डॉ. मदन मोहन झा और पटना शिक्षक से संजय कुमार यादव को मैदान में उतारा गया है। इनमें चार सीटों पर RJD पहले ही अपने प्रत्याशी घोषित कर चुका है। 

इन सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशी

RJD और कांग्रेस के बीच पटना शिक्षक, पटना स्नातक, कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों पर मुकाबले की स्थिति बनी है। RJD ने पटना शिक्षक सीट से संजीव कुमार, पटना स्नातक से दिलीप कुमार, कोसी स्नातक से नितेश कुमार और दरभंगा स्नातक से अनिल कुमार झा को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने इन चार सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारकर अलग चुनावी रणनीति का संकेत दिया है। हालांकि, दरभंगा शिक्षक सीट पर दोनों दलों के बीच सीधे मुकाबले की स्थिति नहीं है। कांग्रेस ने यहां मौजूदा विधान परिषद सदस्य और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि RJD ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। 

8 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान

बिहार विधान परिषद की इन 8 सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हैं। चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। मतदान 23 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को कराई जाएगी।  महागठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में उतरने से अब सबकी नजर इस बात पर है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक सीटों पर कोई समझौता होता है या दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं। इस बीच तिरहुत और सारण शिक्षक सीटों पर वाम दलों की मौजूदगी भी मुकाबले को बहुकोणीय बना रही है। 

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