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बिहार में टाउनशिप के लिए जमीन देने पर किसानों को मिलेंगे 4 विकल्प, विरोध के बीच सम्राट सरकार का बड़ा फैसला

बिहार में टाउनशिप के लिए जमीन देने पर किसानों को मिलेंगे 4 विकल्प, विरोध के बीच सम्राट सरकार का बड़ा फैसला

बिहार में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं के लिए जमीन लेने को लेकर किसानों के विरोध के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार अब किसानों की जमीन लेने से पहले उन्हें चार अलग-अलग विकल्प देगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की सहमति से जमीन हासिल करना और टाउनशिप परियोजनाओं को लेकर पैदा हुए विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाना है।

राज्य में 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इन परियोजनाओं के लिए जमीन चिह्नित किए जाने के बाद कई इलाकों में किसान और ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। हाल ही में पाटलिपुत्र टाउनशिप को लेकर हुई बैठक में भी किसानों ने जोरदार विरोध किया था और जमीन लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

सबसे पहले लैंड पुलिंग का विकल्प

नगर विकास एवं आवास विभाग के अनुसार, किसानों को सबसे पहले लैंड पुलिंग का विकल्प दिया जाएगा। इसमें किसी क्षेत्र के किसानों की सहमति से जमीन को एक साथ लेकर वहां सड़क, नाला, पार्क, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

इस प्रक्रिया की खास बात यह होगी कि विकसित क्षेत्र में जमीन मालिकों को उनके हिस्से की करीब 55 प्रतिशत जमीन वापस दी जाएगी। यह जमीन विकसित सेक्टर में किसी अन्य स्थान पर भी दी जा सकती है।

दूसरा विकल्प आपसी समझौता

सरकार किसानों को negotiated settlement यानी आपसी बातचीत और समझौते का विकल्प भी देगी। इसके तहत जमीन मालिकों से बातचीत करके जमीन लेने का प्रयास किया जाएगा। इसके बदले किसानों को अतिरिक्त लाभ दिए जा सकते हैं।

इन लाभों में अतिरिक्त एफएआर, टीडीआर और विकास शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सरकार का मानना है कि बातचीत के जरिए किसानों की सहमति हासिल करने से जमीन संबंधी विवाद को कम किया जा सकता है।

तीसरा विकल्प जमीन खरीद या अधिग्रहण

यदि किसान सहमति से जमीन देने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो सरकार जमीन खरीदने या जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण का विकल्प अपनाएगी। खास तौर पर सड़क, नाला, पार्क, स्कूल-कॉलेज जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आवश्यक जमीन को लेकर यह प्रक्रिया लागू हो सकती है।

सरकार पहले किसानों से जमीन बेचने के लिए सहमति लेने का प्रयास करेगी। सहमति नहीं बनने की स्थिति में नियमों के अनुसार भूमि अधिग्रहण किया जा सकता है।

चौथा विकल्प होगा हाइब्रिड मॉडल

चौथा विकल्प हाइब्रिड मॉडल रखा गया है। इसमें एक ही सेक्टर में अलग-अलग किसानों के लिए लैंड पुलिंग, आपसी सहमति, जमीन खरीद या भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाएं एक साथ अपनाई जा सकती हैं। किसान जिस प्रक्रिया के तहत जमीन देने के लिए तैयार होंगे, उसी के अनुसार जमीन लेने पर विचार किया जाएगा।

सरकार अब किसानों के बीच जाकर इन चारों विकल्पों की जानकारी देगी। इसके बाद उनकी सहमति और आपत्तियों के आधार पर जमीन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। पाटलिपुत्र टाउनशिप की विकास योजना का प्रारूप प्रकाशित हो चुका है और इसमें 30 सेक्टर प्रस्तावित हैं।

सरकार पहले ही यह संकेत दे चुकी है कि टाउनशिप के लिए जमीन देने वाले किसानों को विकसित जमीन में हिस्सेदारी या परिस्थितियों के अनुसार मुआवजे का विकल्प दिया जाएगा। ऐसे में अब चार विकल्पों की व्यवस्था को किसानों की नाराजगी दूर करने और टाउनशिप परियोजनाओं को गति देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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