बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा पर EOU की जांच तेज, 25-30% रिजल्ट वाले टॉप-20 केंद्रों की लिस्ट का इंतजार
बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही EOU ने 25 से 30 प्रतिशत तक अभ्यर्थियों के सफल होने वाले परीक्षा केंद्रों की जानकारी मांगी है। टॉप-20 केंद्रों की सूची का जवाब अभी BPSSC से नहीं मिला है।
बिहार में दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच अब और तेज हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की विशेष जांच टीम इस परीक्षा के रिजल्ट पैटर्न और परीक्षा केंद्रों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसी क्रम में EOU ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग यानी BPSSC से उन टॉप-20 परीक्षा केंद्रों की सूची मांगी थी, जहां परीक्षार्थियों की संख्या के अनुपात में सबसे अधिक अभ्यर्थी सफल हुए हैं। हालांकि, इस सूची को लेकर आयोग की ओर से अभी तक जवाब नहीं मिला है।
25 से 30 प्रतिशत अभ्यर्थियों के पास होने की शिकायत
जांच एजेंसी को कुछ परीक्षा केंद्रों पर 25 से 30 प्रतिशत तक अभ्यर्थियों के उत्तीर्ण होने की शिकायत मिली थी। इसके बाद EOU ने ऐसे केंद्रों की पहचान कर उनका रिजल्ट पैटर्न देखने के लिए टॉप-20 केंद्रों की जानकारी मांगी। एजेंसी यह समझना चाहती है कि इन केंद्रों पर सफल अभ्यर्थियों का अनुपात सामान्य है या किसी तरह का असामान्य पैटर्न दिखाई देता है।
इसके अलावा EOU ने ऐसे परीक्षा केंद्रों का भी ब्योरा मांगा है, जहां क्रमवार रोल नंबर वाले बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सफल हुए हैं। जांच टीम इन आंकड़ों का मिलान परीक्षा केंद्र, अभ्यर्थियों और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड से कर रही है।
BPSSC के जवाब से EOU पूरी तरह संतुष्ट नहीं
BPSSC ने EOU को दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दिए हैं। हालांकि जांच एजेंसी के मुताबिक आयोग की ओर से दिए गए जवाब में कई बिंदु अभी स्पष्ट नहीं हैं। EOU की SIT फिलहाल मिले जवाबों का बिंदुवार अध्ययन और सत्यापन कर रही है। आठ सितंबर को मांगी गई कुछ जानकारियों का जवाब अभी भी लंबित बताया गया है।
CCTV और परीक्षा कर्मचारियों की भी जानकारी मांगी
EOU ने सिर्फ परीक्षा परिणाम से जुड़ा डेटा ही नहीं मांगा है। शिकायत वाले परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज भी जांच के लिए तलब की गई है। इनमें पूर्णिया और गया के उन केंद्रों को भी शामिल किया गया है, जिनसे संबंधित मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई है।
इसके साथ ही संबंधित केंद्रों के तत्कालीन केंद्राधीक्षक, वीक्षक, बायोमीट्रिक कर्मियों और जैमर कर्मियों की सूची भी मांगी गई है। जांच एजेंसी इन कर्मचारियों की भूमिका और उपलब्ध रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है।
पेपर लीक के प्रमाण अभी नहीं मिले
EOU सूत्रों के मुताबिक, अब तक की जांच में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि पूर्णिया में एक शिक्षक द्वारा प्रश्नपत्र की तस्वीर वाट्सऐप के जरिए पटना भेजे जाने और गया में परीक्षा के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र की तस्वीर कहां से बाहर आई और इसके पीछे कौन लोग हो सकते हैं।
आगे क्या करेगी EOU
फिलहाल SIT BPSSC से मिले जवाबों और दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। टॉप-20 परीक्षा केंद्रों की सूची और उनसे जुड़ा विस्तृत डेटा मिलने के बाद जांच एजेंसी रिजल्ट पैटर्न, केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों और अन्य रिकॉर्ड का आपस में मिलान कर सकती है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जिन केंद्रों पर अपेक्षाकृत अधिक अभ्यर्थी सफल हुए, वहां कोई अनियमितता हुई थी या नहीं। फिलहाल EOU की जांच जारी है और किसी परीक्षा केंद्र को दोषी ठहराने वाला निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

