दारोगा भर्ती पेपर लीक की जांच EOU ने संभाली, पूर्णिया-गया कनेक्शन खंगालेगी एजेंसी
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की ओर से आयोजित दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा में कथित पेपर लीक और सॉल्वर सिंडिकेट के मामले की जांच अब आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU करेगी। सरकार के निर्देश के बाद EOU ने पूर्णिया और गया में दर्ज दोनों मामलों को अपने हाथ में ले लिया है। जांच एजेंसी अब दोनों घटनाओं के बीच किसी संभावित कनेक्शन की तलाश करेगी। इसके लिए डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की गहन जांच की जाएगी।
दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा 27 मई 2026 को 1,799 पदों के लिए आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान पूर्णिया में प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर आने का मामला सामने आया था। वहीं गया में परीक्षा केंद्र के आसपास कथित सॉल्वर गैंग से जुड़े लोगों की गतिविधियों का खुलासा हुआ था। दोनों मामलों को अलग-अलग थानों में दर्ज किया गया था।
पूर्णिया और गया के मामलों को एक साथ रखकर होगी जांच
EOU अब दोनों मामलों की जांच को एक साथ आगे बढ़ाएगी। पूर्णिया साइबर थाना और गया के रामपुर थाना में मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को पटना बुलाया गया है। उनसे केस डायरी, जब्ती सूची, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ अब तक जुटाए गए फोरेंसिक साक्ष्यों की जानकारी ली जा रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि दोनों मामलों में शामिल लोगों के बीच किसी तरह का संपर्क था या नहीं। अगर कोई कनेक्शन सामने आता है तो यह भी जांच की जाएगी कि कथित पेपर लीक और सॉल्वर नेटवर्क किस तरह एक-दूसरे से जुड़े थे।
मोबाइल और WhatsApp चैट की होगी फोरेंसिक जांच
इस पूरे मामले में डिजिटल सबूतों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। EOU आरोपियों के मोबाइल फोन, WhatsApp चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच करेगी। एजेंसी तस्वीरों और संदेशों के टाइम स्टांप का भी मिलान करेगी।
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रश्नपत्र की तस्वीर कब खींची गई, किस मोबाइल फोन से ली गई, किस व्यक्ति को भेजी गई और उसके बाद वह कितने लोगों तक पहुंची। GPS और अन्य डिजिटल डेटा के जरिए आरोपियों की लोकेशन का भी मिलान किया जा सकता है।
इसके अलावा कथित WhatsApp ग्रुप में शामिल लोगों की पहचान और उनकी बातचीत की भी जांच की जाएगी। EOU यह पता लगाना चाहती है कि पूर्णिया से बाहर आई प्रश्नपत्र की तस्वीरों का गया में सामने आए सॉल्वर सिंडिकेट से कोई डिजिटल संपर्क था या नहीं।
वीक्षक की भूमिका भी जांच के दायरे में
पूर्णिया मामले में राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार पर प्रश्नपत्र की तस्वीरें लेने का आरोप लगा है। आरोप के मुताबिक उन्होंने अनुपस्थित अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र स्टोररूम में ले जाकर उनकी तस्वीरें खींचीं और कथित तौर पर WhatsApp के माध्यम से अपने ममेरे भाई पप्पू कुमार को भेजीं।
अब EOU यह पता लगाएगी कि तस्वीरें आगे किन लोगों तक पहुंचीं और क्या इनका इस्तेमाल कथित सॉल्वर नेटवर्क ने किया। इसके लिए मोबाइल डेटा और WhatsApp चैट की तकनीकी जांच की जाएगी।
गया में सॉल्वर गैंग का सुराग
गया में परीक्षा के दौरान पुलिस ने कथित सॉल्वर गैंग से जुड़े एक व्यक्ति को पकड़ा था। उसके पास से वॉकी-टॉकी, ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच के दौरान एक WhatsApp ग्रुप का भी पता चला, जिसके जरिए परीक्षा के सवालों को हल कराने की कथित कोशिश की जा रही थी।
अब EOU इस ग्रुप की डिजिटल हिस्ट्री खंगालेगी। इसमें शामिल सदस्यों, उनकी बातचीत और एक-दूसरे से संपर्क की जानकारी जुटाई जाएगी। एजेंसी यह भी जांच करेगी कि पूर्णिया से सामने आई प्रश्नपत्र की तस्वीरें इसी नेटवर्क तक पहुंची थीं या नहीं।
10,759 अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी होने के बाद फिजिकल टेस्ट रुका
पेपर लीक के आरोपों के बीच BPSSC ने 19 जून को 10,759 अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी किया था। इसके बाद चयन प्रक्रिया के अगले चरण में शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट होना था। हालांकि विवाद के बाद फिजिकल टेस्ट को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया।
अब EOU की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि परीक्षा में वास्तव में प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग हुई थी या नहीं। अगर पेपर लीक की पुष्टि होती है तो इसके पीछे शामिल लोगों और पूरे नेटवर्क की पहचान की जाएगी।
फिलहाल जांच एजेंसी का मुख्य फोकस पूर्णिया और गया के मामलों के बीच संभावित डिजिटल कनेक्शन, प्रश्नपत्र की तस्वीरों के प्रसार और कथित अंतरजिला सॉल्वर सिंडिकेट की भूमिका पर है। जांच में सामने आने वाले डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

