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राजस्व मंत्री के गृह जिले में 5.12 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं

राजस्व मंत्री के गृह जिले में 5.12 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं

बिहार के किशनगंज जिले में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। राजस्व मंत्री के गृह जिले में करीब 5 एकड़ 12 डिसमिल सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण होने के बावजूद प्रशासन एक माह बीत जाने के बाद भी कब्जा नहीं हटा सका है। मामले में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किए जाने के बावजूद जमीन अब भी अतिक्रमणमुक्त नहीं हो सकी है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित सरकारी भूमि पर लंबे समय से कब्जे की शिकायतें मिल रही थीं। जांच के बाद एसडीएम ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि, आदेश जारी होने के करीब एक माह बाद भी जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा हटाने में हो रही देरी से सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं। उनका आरोप है कि आदेश जारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

मामले को लेकर राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी चर्चा में है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी आदेशों का समय पर पालन नहीं होगा तो कानून व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही है और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि यह जिला राज्य के राजस्व मंत्री का गृह जिला है। ऐसे में सरकारी भूमि पर कब्जा और उसे हटाने में हो रही देरी को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस मामले में किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भूमि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि भविष्य की विकास परियोजनाओं में भी बाधा बन सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है।

फिलहाल स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई जल्द पूरी की जाएगी।

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