बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर में बुधवार को 30 वर्षीय भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भोजपुर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के दौरान सरेंडर करने के बावजूद भरत को गोली मार दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद गुरुवार को आरा में स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब स्थानीय लोगों और परिजनों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी ने मौके पर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। इस घटना को उन्होंने “फर्जी एनकाउंटर” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर जमा हो गए।
सड़क जाम के कारण आरा शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही और कई जगहों पर लंबा जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती स्तर पर दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि की जा रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों ने भी घटना पर चिंता जताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रदर्शनकारियों को समझाकर जाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

