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‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ पर रहेगा जोर, मिट्टी जांच को मिलेगा बढ़ावा

‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ पर रहेगा जोर, मिट्टी जांच को मिलेगा बढ़ावा

कृषि क्षेत्र में संतुलित पोषण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान का मुख्य फोकस ‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ के सिद्धांत को हर खेत तक पहुंचाना है। अभियान के तहत किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि खेती की लागत कम हो और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।

रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग पर रोक

विशेषज्ञों का मानना है कि कई क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों का आवश्यकता से अधिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ किसानों की लागत भी बढ़ रही है। अभियान के जरिए किसानों को फसलों की जरूरत के अनुसार उर्वरकों के उपयोग की सही जानकारी दी जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना भी है।

मिट्टी जांच पर विशेष जोर

अभियान के दौरान राज्यभर में मिट्टी की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी। किसानों को अपनी भूमि की मिट्टी का परीक्षण कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खेत में किन पोषक तत्वों की कमी या अधिकता है।

मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग की सलाह दी जाएगी, जिससे फसल उत्पादन में सुधार और अनावश्यक खर्च में कमी आ सके।

किसानों को मिलेगी वैज्ञानिक सलाह

अभियान के तहत कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ किसानों को खेत स्तर पर मार्गदर्शन देंगे। उन्हें बताया जाएगा कि किस फसल के लिए कौन-सी खाद, कितनी मात्रा में और किस समय प्रयोग करनी चाहिए।

इसके अलावा जैविक और प्राकृतिक विकल्पों को अपनाने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

खेती की लागत घटाने की पहल

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से किसानों की लागत में कमी आएगी और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।

किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है अभियान

‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ का यह अभियान कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि मिट्टी जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग के माध्यम से किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे और खेती को अधिक लाभकारी बना पाएंगे।

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