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आवारा कुत्तों के झुंड ने बुजुर्ग को नोच-नोच कर मार डाला, DJ की आवाज में दब गई चीखें
 

आवारा कुत्तों के झुंड ने बुजुर्ग को नोच-नोच कर मार डाला, DJ की आवाज में दब गई चीखें 9 ho

बिहार के मुजफ्फरपुर में कुत्तों के झुंड ने एक वृद्ध को नोच-नोच कर मार डाला। घटना बोचहां थाना क्षेत्र के मैदापुर गांव की है। मृतक की पहचान रामानंद साह के रूप में हुई है। जब कुत्तों ने वृद्ध पर हमला किया, उस समय पास में ही डीजे बज रहा था। वृद्ध की चीखें डीजे की आवाज में दब गईं और कोई भी उनकी मदद के लिए नहीं पहुंच सका। इस घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

वृद्ध मैदापुर स्थित लीची के बगीचे में जलावन (खाना पकाने के लिए लकड़ी) चुनने गया था। इसी दौरान एक दर्जन से अधिक आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। उन्होंने वृद्ध के शरीर के कई हिस्सों को नोच डाला। पास में ही डीजे बजने के कारण समय रहते किसी को रामानंद की चीखें सुनाई नहीं दीं। दर्द से तड़पते हुए उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

शव को देखकर परिजन दहाड़ मारकर रो रहे थे

जब तक आसपास के लोग उस तक पहुंच पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। परिवार में कोहराम मच गया। शव को देखकर परिजन काफी रो रहे हैं। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही गांव में ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। उनके घर में लकड़ी से मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनता है। मुखिया पंकज चौधरी ने बताया कि वृद्ध खाना खाने के बाद लकड़ी लाने गया था। डीजे बजने के कारण चिल्लाने की आवाज नहीं सुनाई दी। जब तक लोग पहुंचे, वृद्ध की मौत हो चुकी थी। मृतक के पुत्र संजीत साह ने बताया कि गांव में शादी थी। तेज आवाज में डीजे बज रहा था। पिता के चिल्लाने की आवाज नहीं सुनाई दी। जब तक लोग पहुंचे, वृद्ध की मौत हो चुकी थी। कुत्तों के आतंक से गांव में दहशत कुत्तों के हमले में वृद्ध की मौत से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि वे 2 साल से कुत्तों के आतंक को झेल रहे हैं। लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है। दिन में भी सुनसान सड़क से गुजरने में डर लगता है। मैदापुर और सर्फुद्दीनपुर में कई महीनों से आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। ग्रामीण काफी परेशान हैं। कुत्तों के आतंक के कारण बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसान भी डरे हुए रहते हैं। प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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