Samachar Nama
×

पूर्णिया के कोरटबारी में मन्नत पूरी होने पर दी जाती है बकरों की बलि, 2007 से हो रही दुर्गा पूजा; नवमी पर खिचड़ी महाभोग

पूर्णिया के कोरटबारी में मन्नत पूरी होने पर दी जाती है बकरों की बलि, 2007 से हो रही दुर्गा पूजा; नवमी पर खिचड़ी महाभोग

बिहार के पूर्णिया जिले के कोरटबारी में दुर्गा पूजा का आयोजन श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। यहां वर्ष 2007 से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार, मन्नत पूरी होने पर कुछ श्रद्धालु बकरों की बलि भी देते हैं। दुर्गा पूजा के अवसर पर यहां सप्तमी से नवमी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जबकि महानवमी पर श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी महाभोग की व्यवस्था की जाती है।

कोरटबारी में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। इसके बाद से हर साल यहां पूजा का आयोजन किया जा रहा है। समय के साथ यह आयोजन स्थानीय लोगों की आस्था और धार्मिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। पूजा के दौरान आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां दुर्गा के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।

2007 से हो रही मां दुर्गा की पूजा

कोरटबारी में वर्ष 2007 से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु पूजा पंडाल में पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करते हैं।

स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का अवसर भी है। दुर्गा पूजा के दौरान क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहता है। पूजा से जुड़े कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की भागीदारी रहती है।

मन्नत पूरी होने पर बकरों की बलि की परंपरा

कोरटबारी में दुर्गा पूजा के दौरान मन्नत पूरी होने पर बकरों की बलि देने की परंपरा भी निभाई जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद माता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

हालांकि, इस परंपरा के तहत कितने बकरों की बलि दी जाती है, इसकी सटीक संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस संबंध में कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया जा सकता।

सप्तमी से नवमी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम

दुर्गा पूजा के दौरान कोरटबारी में सप्तमी से नवमी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने का अवसर मिलता है। पूजा के दौरान क्षेत्र के लोग उत्साह के साथ शामिल होते हैं और त्योहार की खुशियां साझा करते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को भी प्रोत्साहित करना है। इन कार्यक्रमों के चलते पूजा पंडाल में उत्सवी माहौल बना रहता है।

महानवमी पर खिचड़ी महाभोग का आयोजन

कोरटबारी में दुर्गा पूजा के दौरान महानवमी का विशेष महत्व है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी महाभोग की व्यवस्था की जाती है। धार्मिक आयोजनों में महाभोग और प्रसाद वितरण को विशेष स्थान दिया जाता है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।

पूर्णिया के कोरटबारी में वर्ष 2007 से चली आ रही दुर्गा पूजा की परंपरा आज भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है। बकरों की बलि की स्थानीय परंपरा, सप्तमी से नवमी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम और महानवमी पर खिचड़ी महाभोग इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं हैं।

Share this story

Tags