नालंदा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने लाओस के सुपानुवोंग विश्वविद्यालय का किया दौरा, शिक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा
नालंदा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने लाओस की अपनी तीन दिवसीय अकादमिक यात्रा के अंतिम चरण में उत्तरी लाओस के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान सुपानुवोंग विश्वविद्यालय का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और शोध सहयोग को मजबूत करना रहा। प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा को भारत और लाओस के बीच शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सुपानुवोंग विश्वविद्यालय में प्रतिनिधिमंडल का स्वागत विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों ने किया। इस दौरान दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा, अनुसंधान, छात्र आदान-प्रदान और अकादमिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में यह बात सामने आई कि दोनों विश्वविद्यालय मिलकर ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दे सकते हैं।
नालंदा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने प्राचीन नालंदा की विरासत और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर बौद्ध अध्ययन, शांति अध्ययन, पर्यावरण, ऐतिहासिक शोध और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वहीं, सुपानुवोंग विश्वविद्यालय ने भी अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और शोध गतिविधियों की जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल ने लाओस के छात्रों और शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए भारत और लाओस के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर भी चर्चा की। दोनों देशों के बीच बौद्ध संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपराओं का गहरा संबंध रहा है, जिसे शिक्षा के माध्यम से और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
दौरे के दौरान संयुक्त शोध परियोजनाओं, फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रमों और विद्यार्थियों के लिए नए अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की शैक्षणिक यात्राएं दोनों देशों के युवाओं और शोधकर्ताओं के लिए नए रास्ते खोल सकती हैं।
नालंदा विश्वविद्यालय और सुपानुवोंग विश्वविद्यालय के बीच संभावित सहयोग से दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के बीच शैक्षणिक संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह पहल न केवल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाएगी, बल्कि दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान देगी।
नालंदा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान लाओस के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ा और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को तलाशा। सुपानुवोंग विश्वविद्यालय की यात्रा के साथ यह अकादमिक दौरा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने भारत-लाओस शिक्षा संबंधों को एक नई दिशा देने का काम किया है।

