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मैट्रिक परीक्षा में देरी बनी जानलेवा, प्रवेश न मिलने पर छात्रा ने की आत्महत्या

मैट्रिक परीक्षा में देरी बनी जानलेवा, प्रवेश न मिलने पर छात्रा ने की आत्महत्या

बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा के दौरान एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। मसौढ़ी में एक छात्रा ने परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलने से आहत होकर आत्महत्या कर ली। वह निर्धारित समय से लगभग 10 मिनट देरी से परीक्षा केंद्र पहुंची थी, जिसके कारण उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

जानकारी के अनुसार, छात्रा समय से कुछ देर बाद परीक्षा केंद्र पहुंची, लेकिन सख्त नियमों का हवाला देते हुए केंद्र प्रशासन ने उसे प्रवेश देने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि परीक्षा के नियमों के तहत निर्धारित समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं होती। हालांकि, इस फैसले ने छात्रा को गहरे सदमे में डाल दिया।

परिजनों के मुताबिक, परीक्षा नहीं दे पाने के कारण वह बेहद हताश हो गई थी। घर लौटते समय उसने चलती ट्रेन से कूदकर अपनी जान दे दी। इस घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

यह पूरी घटना Bihar School Examination Board द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा के दौरान हुई। बोर्ड की ओर से परीक्षा में समय की पाबंदी को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन इस हादसे ने परीक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया जाना चाहिए। कई अभिभावकों ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि महज कुछ मिनट की देरी के कारण किसी छात्र का भविष्य और जीवन दोनों खत्म हो जाना बेहद चिंताजनक है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव रहता है। असफलता या किसी बाधा की स्थिति में वे भावनात्मक रूप से टूट सकते हैं। ऐसे में स्कूलों और परिवारों को बच्चों को भावनात्मक सहयोग देने की आवश्यकता है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखा गया। कई लोगों ने परीक्षा नियमों में लचीलापन और आपात स्थितियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। हालांकि, आधिकारिक रूप से बोर्ड की ओर से इस घटना पर विस्तृत बयान आना बाकी है।

यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन के साथ-साथ संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। एक छोटी सी देरी ने एक परिवार से उसकी बेटी छीन ली और पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।

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