दूध में मिलाया जा रहा जानलेवा केमिकल! दानापुर और भट्टीपर में सैंपल जांच से खुलासा
बिहार में दूध की शुद्धता को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दानापुर और भट्टीपर इलाके में लिए गए दूध के सैंपलों की जांच में कथित तौर पर ऐसा केमिकल पाए जाने की बात सामने आई है, जिसका इस्तेमाल शव को सड़ने से बचाने के लिए किया जाता है। इस खुलासे के बाद दूध की गुणवत्ता और लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दूध की गुणवत्ता की जांच के लिए अलग-अलग स्थानों से सैंपल लिए थे। जांच के दौरान दूध में ऐसे रसायन की मौजूदगी का पता चला, जिसे सामान्य तौर पर दूध में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रिपोर्ट सामने आने के बाद अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है और मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
दूध रोजमर्रा के खान-पान का अहम हिस्सा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में यदि दूध में हानिकारक रसायन मिलाकर उसकी गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, तो यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
ज्यादा समय तक दूध खराब न हो, इसलिए मिलावट का आरोप
मिलावट को लेकर आशंका है कि दूध को लंबे समय तक खराब होने से बचाने या उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रतिबंधित रसायन का इस्तेमाल किया जा रहा है। गर्मी और सामान्य तापमान में दूध जल्दी खराब हो सकता है। ऐसे में कुछ लोग अवैध तरीके से रसायनों का इस्तेमाल कर दूध को अधिक समय तक सुरक्षित रखने की कोशिश कर सकते हैं।
हालांकि, दूध में किसी भी रसायन का इस्तेमाल तय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही किया जा सकता है। ऐसे पदार्थों का अनधिकृत इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ी चिंता
दानापुर और भट्टीपर से लिए गए सैंपलों की जांच में सामने आए परिणामों के बाद खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों के सामने अब यह चुनौती है कि मिलावटी दूध की सप्लाई कहां से हो रही है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
प्रशासन की ओर से ऐसे मामलों में सैंपलिंग और जांच की प्रक्रिया को और तेज किया जा सकता है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ताओं को भी रहना होगा सतर्क
दूध खरीदते समय उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। खुले में बिकने वाले दूध की गुणवत्ता को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। किसी भी तरह की संदिग्ध स्थिति नजर आने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा सकती है।
फिलहाल दानापुर और भट्टीपर में सामने आए सैंपल जांच के नतीजों ने दूध में मिलावट के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अगर जांच में प्रतिबंधित रसायन की मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो यह मामला आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा बेहद गंभीर मामला माना जाएगा।

